फास्ट ट्रैक आधार पर ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के लिए अलग टॉयलेट बनाए जाएंगे: दिल्ली हाईकोर्ट में राज्य सरकार ने कहा
दिल्ली हाईकोर्ट को राज्य सरकार ने सूचित किया कि वह ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के उपयोग के लिए अलग टॉयलेट का निर्माण सुनिश्चित करने के लिए हर संभव प्रयास कर रही है। सरकार कहा कि इस काम को फास्ट ट्रैक आधार पर किया जाएगा।
चीफ जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा और जस्टिस सुब्रमण्यम प्रसाद की खंडपीठ को दिल्ली सरकार ने आगे बताया कि विकलांग व्यक्तियों के लिए बने 505 टॉयलेट को ट्रांसजेंडर या तीसरे लिंग के व्यक्तियों के उपयोग के लिए नामित किया गया है।
दिल्ली सरकार के समाज कल्याण विभाग द्वारा 27 जुलाई को दायर की गई स्टेटस रिपोर्ट में आगे कहा गया कि ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के उपयोग के लिए कुल नौ नए टॉयलेट पहले ही बनाए जा चुके हैं और 56 और टॉयलेट का निर्माण जारी है।
इसके अलावा, यह कहा गया कि दिल्ली सरकार द्वारा यह सुनिश्चित करने के लिए गंभीर प्रयास किए जा रहे हैं कि ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के लिए अलग टॉयलेट बनाने का काम फास्ट ट्रैक आधार पर पूरा हो।
अदालत ने आदेश दिया,
"उपरोक्त के मद्देनजर, प्रतिवादी/जीएनसीटीडी को ट्रांसजेंडर/तीसरे लिंग के व्यक्तियों के उपयोग के लिए बनाए गए नए टॉयलेट के बारे में इस न्यायालय को सूचित करते हुए नई स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने के लिए छह सप्ताह का समय दिया गया है।"
एडवोकेट रूपिंदर पाल सिंह के माध्यम से जैस्मीन कौर छाबड़ा द्वारा दायर जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान अदालत ने यह निर्देश दिया।
याचिका में ट्रांसजेंडर समुदाय के लिए अलग टॉयलेट बनाने की आवश्यकता को निर्दिष्ट करते हुए 15 अक्टूबर, 2017 के स्वच्छ भारत मिशन दिशानिर्देशों के अनुपालन में आवश्यक कार्रवाई करने का निर्देश देने की मांग की गई है।
इसके अतिरिक्त, ऐसे टॉयलेट को स्वच्छ बनाए रखने के लिए दिशा-निर्देश दिए जाने की मांग की है ताकि नालसा फैसले के संदर्भ में ट्रांसजेंडर समुदाय के अधिकारों की रक्षा की जा सके।
याचिका में कहा गया कि हर इंसान का अलग पब्लिक टॉयलेट का करना उपयोग बुनियादी मानवाधिकार हैं। ऐसे में ट्रांसजेंडर या तीसरे लिंग के व्यक्तियों को ऐसी सुविधाएं प्रदान नहीं करना अनुच्छेद 14 और 21 का उल्लंघन होगा।
मामले की अगली सुनवाई 14 नवंबर को होगी।
केस टाइटल: जैस्मीन कौर छाबड़ा बनाम यूओआई और अन्य।
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