वरिष्ठ वकीलों ने शुक्रवार को अटॉर्नी-जनरल से अपील की कि सरकार को यह सुनिश्चित करने के लिए अनुरोध करें कि बार के वरिष्ठ सदस्यों को COVID ​​-19 की वैक्सीन जल्द से जल्द उपलब्ध कराई जाए।

वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी ने टिप्पणी की,

"मुझे लगता है कि एजी को अपने संवैधानिक अधिकार का उपयोग करना चाहिए और सरकार से अनुरोध करना चाहिए कि यह सुनिश्चित करें कि टीका बार के सभी वरिष्ठ वकीलों को दिया जाए।"

उन्होंने आगे कहा कि,

"वरिष्ठ" शब्द से, वह केवल उन लोगों का जिक्र नहीं कर रहे हैं जो वरिष्ठ अधिवक्ता हैं, बल्कि उम्र के लिहाज से "वरिष्ठ" हैं।

महाराष्ट्र सामाजिक और शैक्षणिक रूप से पिछड़ा वर्ग (एसईबीसी) अधिनियम, 2018 की संवैधानिकता के खिलाफ चुनौती देने वाली याचिकाओं की संविधान पीठ के सामने सुनवाई के दौरान ये टिप्पणियां की गईं।

पिछली सुनवाई में, रोहतगी ने COVID-19 महामारी के चलते भारी भरकम फाइलों के कारण मामले की तैयारी के लिए वकीलों की अक्षमता से संबंधित अपनी चिंताओं को आगे रखा था, जिसके चलते शारीरिक रूप से सुनवाई की आवश्यकता थी।

रोहतगी ने कहा कि उन्होंने "कोर्ट के गलियारों" में सुना है कि सुप्रीम कोर्ट ने लगभग एक साल की वर्चुअल सुनवाई के बाद शारीरिक रूप से कामकाज फिर से शुरू करने का इरादा किया था।

चर्चा के दौरान, जिसमें वरिष्ठ अधिवक्ता अरविंद दातार, कपिल सिब्बल और श्याम दीवान भी शामिल थे, रोहतगी ने अदालत को सूचित किया कि केवल 50% लोग टीकाकरण के लिए पहुंच रहे हैं और स्टॉक जमा हो रहा है।

रोहतगी ने कहा,

"किसी ने मुझे इस मुद्दे पर एक जनहित याचिका दायर करने के लिए कहा है।"

दातार ने हर्ड इम्यूनिटी की बात उठाई, रोहतगी ने उल्लेख किया कि उन्होंने दिल्ली सरकार से बात की थी जिन्होंने उन्हें सूचित किया था कि 60-70% को हर्ड इम्यूनिटी प्राप्त करने में 3-4 महीने लगेंगे।

इस समय, रोहतगी ने एजी से अपील की कि वे अपने संवैधानिक अधिकार का प्रयोग करें ताकि सरकार से कानूनी बिरादरी के वरिष्ठ सदस्यों को वैक्सीन लगाने का अनुरोध किया जा सके।

कानूनी बिरादरी के लिए टीकाकरण कार्यक्रम के विस्तार और "फ्रंटलाइन वर्कर्स" के दायरे में शामिल करने के लिए इसी तरह के अनुरोध पहले सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन द्वारा भी किए गए हैं।

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