ग्रोसरी की दुकान चलाने की बात कहने पर SEBI ने रिसर्च एनालिस्ट का रजिस्ट्रेशन रद्द किया
भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) ने एक रिसर्च एनालिस्ट का रजिस्ट्रेशन रद्द कर दिया, जब संबंधित व्यक्ति ने नियामक को बताया कि वह वास्तव में एक छोटी किराना (ग्रोसरी) दुकान चलाता है और प्रतिभूति बाजार से जुड़ी किसी भी गतिविधि में संलग्न नहीं है। यह कार्रवाई उस मामले के बाद की गई, जिसमें उसके SEBI रजिस्ट्रेशन विवरण का कथित तौर पर एक गैर-पंजीकृत निवेश सलाहकार फर्म द्वारा दुरुपयोग किया गया।
SEBI के अनुसार, संबंधित व्यक्ति (नोटिसी) को 19 जून, 2018 को रिसर्च एनालिस्ट के रूप में रजिस्ट्रेशन दिया गया। जून 2022 और फरवरी 2023 में नियामक को शिकायतें मिली थीं कि “optionresearch.in” नामक एक वेबसाइट निवेशकों को सुनिश्चित रिटर्न का लालच देकर निवेश सलाह दे रही है और खुद को SEBI-प्रमाणित संस्था के रूप में दर्शा रही है। जांच में सामने आया कि वेबसाइट पर नोटिसी के रिसर्च एनालिस्ट पंजीकरण नंबर का इस्तेमाल किया जा रहा था।
SEBI की जांच में यह भी पाया गया कि उक्त वेबसाइट वास्तव में ऑप्शन रिसर्च कंसल्टेंसी (ORC) नामक एक साझेदारी फर्म द्वारा संचालित की जा रही थी, जो SEBI के साथ रजिस्टर्ड नहीं थी। वेबसाइट के जरिए निवेशकों से वसूली गई राशि ORC और उससे जुड़े व्यक्तियों के बैंक खातों में जमा कराई जा रही थी।
इससे पहले अगस्त, 2024 में SEBI ने ORC और उसके भागीदारों के खिलाफ कार्रवाई पूरी की थी। नियामक ने उन्हें निवेशकों को 30 लाख रुपये से अधिक की राशि लौटाने का निर्देश दिया था, दो वर्षों के लिए प्रतिभूति बाजार से प्रतिबंधित किया और उन पर मौद्रिक जुर्माना भी लगाया।
इसके समानांतर SEBI ने नोटिसी के खिलाफ अलग से कार्यवाही शुरू की। SEBI Act के तहत चली न्यायिक कार्यवाही में निर्णय अधिकारी ने उसे संदेह का लाभ देते हुए कहा था कि ऐसा कोई ठोस साक्ष्य नहीं है, जिससे यह साबित हो सके कि उसने ORC के साथ साठगांठ की या उसकी गतिविधियों से कोई वित्तीय लाभ प्राप्त किया।
हालांकि, इंटरमीडियरीज रेगुलेशंस के तहत नियुक्त नामित प्राधिकारी ने इस मामले में अलग दृष्टिकोण अपनाया। प्राधिकारी ने यह गंभीर माना कि नोटिसी ने स्वीकार किया कि उसने अपने रजिस्टर्ड ईमेल आईडी का पासवर्ड ORC के एक भागीदार के साथ साझा किया, जिसे SEBI ने एक पंजीकृत मध्यस्थ के आचरण के लिए अस्वीकार्य बताया।
इसके बाद 30 सितंबर, 2025 को कारण बताओ नोटिस जारी कर नोटिसी का रजिस्ट्रेशन रद्द करने का प्रस्ताव रखा गया। नोटिसी ने लिखित जवाब दाखिल नहीं किया, लेकिन व्यक्तिगत सुनवाई में उपस्थित होकर उसने कहा कि वह एक छोटी रिटेल किराना दुकान चलाता है, रिसर्च एनालिस्ट के रूप में कोई गतिविधि नहीं करता और स्वयं SEBI से अपना रजिस्ट्रेशन रद्द करने का अनुरोध किया।
इन सभी तथ्यों और नोटिसी की सहमति को ध्यान में रखते हुए SEBI ने तत्काल प्रभाव से उसका रिसर्च एनालिस्ट रजिस्ट्रेशन रद्द कर दिया। नियामक ने स्पष्ट किया कि रजिस्टर्ड मध्यस्थों से अपेक्षा की जाती है कि वे अपने रजिस्ट्रेशन विवरण और लॉग-इन क्रेडेंशियल्स की सुरक्षा सुनिश्चित करें और उनका किसी भी प्रकार का दुरुपयोग न होने दें।