एंटीलिया बम मामले में यूएपीए के तहत मुकदमा चलाने की मंजूरी को रद्द करने की मांग को लेकर सचिन वाजे दिल्ली हाईकोर्ट पहुंचे

Update: 2022-01-18 05:57 GMT

बर्खास्त मुंबई पुलिस अधिकारी सचिन वाज़े ने एंटीलिया बम मामले में उन पर मुकदमा चलाने के लिए गैरकानूनी गतिविधि रोकथाम अधिनियम (यूएपीए) के तहत दी गई मंजूरी को रद्द करने के लिए दिल्ली हाईकोर्ट का रुख किया।

जस्टिस सिद्धार्थ मृदुल और जस्टिस अनूप जे. भंभानी की खंडपीठ के समक्ष सोमवार को प्रस्तुत की गई याचिका पर 24 जनवरी को सुनवाई करने का फैसला किया।

सुनवाई के दौरान, वाज़े की ओर से पेश अधिवक्ता पुनीत बाली ने प्रस्तुत किया कि दिल्ली हाईकोर्ट के पास मामले की सुनवाई के लिए क्षेत्रीय अधिकार क्षेत्र है, क्योंकि शहर में स्थित गृह मंत्रालय द्वारा मंजूरी देने का आदेश पारित किया गया है।

दूसरी ओर, केंद्र ने याचिका का विरोध किया। केंद्र ने याचिका की सुनवाई पर प्रारंभिक आपत्तियां उठाईं। तर्क दिया गया कि याचिका को बॉम्बे हाईकोर्ट के समक्ष इस कारण स्थानांतरित किया जाना चाहिए, क्योंकि यह वह जगह है जहां मामले में कार्रवाई का कारण उत्पन्न हुआ।

तदनुसार, अदालत ने 24 जनवरी को मामले की सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करते समय वाज़े के वकील को फैसले की सभी प्रतियों को रखने के लिए कहा।

याचिका में यूएपीए की धारा 15(1) जो कि आतंकवादी कृत्य से संबंधित है, यह तर्क देकर कि यह प्रावधान अनुच्छेद 14 और 21 का उल्लंघन है, मुकदमे की मंजूरी को रद्द करने की मांग की गई। याचिका में केंद्र सरकार द्वारा दो सितंबर, 2021 को पारिता मंजूरी आदेश को रद्द करने की भी मांग की गई।

पृष्ठभूमि

यह मामला पिछले साल 25 फरवरी को उद्योगपति मुकेश अंबानी के घर के पास एक महिंद्रा स्कॉर्पियो में 20 जिलेटिन स्टिक (विस्फोटक) और धमकी भरा नोट बरामद होने और उसके बाद व्यवसायी मनसुख हिरन की हत्या से संबंधित है।

वाज़े को इस मामले में 13 मार्च को गिरफ्तार किया गया था। डिफ़ॉल्ट जमानत के लिए दायर की गई उनकी याचिकाओं को कई बार खारिज कर दिया गया।

एनआईए ने इस महीने की शुरुआत में अपने आरोप पत्र में आरोप लगाया कि वाज़े ने बार और ऑर्केस्ट्रा मालिकों से वसूले गए पैसे का इस्तेमाल व्यवसायी मुकेश अंबानी के परिवार के खिलाफ आतंकी खतरे को अंजाम देने और साजिश में एक "कमजोर कड़ी" मनसुख हिरन को खत्म करने के लिए किया।

एजेंसी ने दावा किया कि वाज़े के कथित अपराध के पीछे का मकसद 16 साल बाद, 2020 में मुंबई पुलिस बल में उनकी बहाली के बाद खोई हुई महिमा को फिर से हासिल करने के लिए खुद को "सुपर कॉप" के रूप में स्थापित करना था।

एनआईए ने वाज़े और नौ अन्य को भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 302, 120 बी, 201, 364, 403 और यूएपीए अधिनियम की धारा 16, 18 और धारा 20 के तहत आरोपी बनाया गया है।

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