एक अंडरट्रायल आरोपी को अंतरिम ज़मानत देते हुए राजस्थान हाईकोर्ट ने कहा कि माता-पिता की गंभीर बीमारी, जिसके लिए तुरंत सर्जरी की मेडिकल सलाह दी गई, उनको ज़रूरी सुरक्षा उपायों के साथ कुछ समय के लिए रिहाई के लिए एक सही मानवीय आधार माना गया।

याचिकाकर्ता के खिलाफ़ कई FIR और कई लेन-देन के आरोपों को देखते हुए जस्टिस फरजंद अली की बेंच ने कहा कि कोर्ट मामलों के नेचर और कई मामलों को ध्यान में रखता है। हालांकि, आर्टिकल 21 के तहत व्यक्तिगत आज़ादी और प्रॉसिक्यूशन केस के हित के बीच संतुलन सख्त सुरक्षा उपाय लागू करके बनाए रखा जा सकता है।

याचिकाकर्ता सितंबर, 2019 से ज्यूडिशियल कस्टडी में है। उसने अपने पिता की गंभीर प्रोस्टेट बीमारी के कारण मानवीय आधार पर अंतरिम रिहाई मांगी, जिसके लिए तुरंत सर्जरी की ज़रूरत है।

यह तर्क दिया गया कि सर्जरी एक जटिल सर्जरी है, जिसमें मेडिकल फॉर्मैलिटी, पोस्ट-ऑपरेटिव देखभाल और ज़रूरी इंतज़ामों के लिए याचिकाकर्ता की मौजूदगी और मदद की ज़रूरत है।

दलीलें सुनने के बाद कोर्ट ने कहा,

“सर्जिकल प्रोसीजर के दौरान और ऑपरेशन के तुरंत बाद अपने बीमार पिता की मदद के लिए याचिकाकर्ता की मौजूदगी की ज़रूरत को नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता, खासकर तब जब मेडिकल कंडीशन की असलियत पर शक करने के लिए कोई सबूत न हो।”

कोर्ट ने आरोपी के लंबे समय तक जेल में रहने, उसके पिता की बीमारी जिसमें तुरंत इलाज की ज़रूरत है, समेत सभी बातों पर ज़ोर दिया। साथ ही कहा कि ऐसी स्थिति में सीमित और खास मकसद के लिए राहत के लिए कोर्ट के अधिकार क्षेत्र का खास इस्तेमाल करना सही है।

इसलिए याचिका मंज़ूर की गई और याचिकाकर्ता को 40 दिनों के लिए रिहा कर दिया गया।

Title: Vikram Singh Rathore v State of Rajasthan & Ors.

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