हरियाणा में कोर्ट की अनुमति के बिना पेड़ काटने पर हाईकोर्ट ने लगाई अस्थायी रोक

Update: 2026-04-03 14:13 GMT

पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने अधिकारियों द्वारा ज़ीरकपुर-पंचकूला बाईपास के लिए काटे जाने वाले पेड़ों के बदले वनीकरण के लिए ज़मीन की उपलब्धता के बारे में कोर्ट के सवाल का जवाब न देने पर नाराज़गी ज़ाहिर की। कोर्ट ने कहा कि अधिकारियों की निष्क्रियता से पता चलता है कि वे पर्यावरण संबंधी चिंताओं को लेकर गंभीर नहीं हैं और इस पर तुरंत सुधारात्मक कदम उठाने की ज़रूरत है।

चीफ़ जस्टिस शील नागू और जस्टिस संजीव बेरी की डिवीज़न बेंच ज़ीरकपुर-पंचकूला बाईपास के निर्माण के लिए लगभग 5000 पेड़ों को काटे जाने के प्रस्ताव से जुड़ी जनहित याचिका (PIL) पर सुनवाई कर रही थी। सुनवाई के दौरान, कोर्ट ने भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) से एक खास सवाल पूछा कि क्या पंजाब और हरियाणा राज्य काटे जाने वाले पेड़ों के बदले वनीकरण के लिए आस-पास के इलाके में ज़मीन देने को तैयार हैं। हालांकि, कोई जवाब नहीं मिला और निर्देश लेने के लिए समय मांगा गया।

कोर्ट ने NHAI को यह भी निर्देश दिया कि वह अपनी तकनीकी टीम द्वारा विचारे गए सभी री-अलाइनमेंट प्रस्तावों को रिकॉर्ड पर रखे, ताकि यह पता लगाया जा सके कि क्या प्रस्तावित बाईपास के लिए किसी वैकल्पिक मार्ग की जाँच की गई थी। कोर्ट के संज्ञान में यह भी लाया गया कि 'इंडियन स्टेट फ़ॉरेस्ट रिपोर्ट 2023' के अनुसार, हरियाणा में वन क्षेत्र उसके भौगोलिक क्षेत्र का केवल 3.65% है।

कम वन क्षेत्र और अधिकारियों की ओर से कोई संतोषजनक जवाब न मिलने को देखते हुए कोर्ट ने कहा कि हरियाणा राज्य के अधिकारी न तो गंभीर लग रहे हैं और न ही वे संभावित पर्यावरणीय परिणामों के प्रति जागरूक हैं। कोर्ट ने कहा कि ऐसी निष्क्रियता के कारण कोर्ट के हस्तक्षेप की ज़रूरत है।

कोर्ट ने कहा,

"...ऐसा लगता है कि हरियाणा राज्य के अधिकारी न तो गंभीर हैं और न ही वे आने वाली पर्यावरणीय तबाही के प्रति जागरूक लगते हैं... प्रतिवादियों की निष्क्रियता के लिए इस कोर्ट द्वारा कड़े सुधारात्मक उपायों की ज़रूरत है।"

तदनुसार, कोर्ट ने निर्देश दिया कि हरियाणा राज्य में बाईपास परियोजना के लिए प्रस्तावित लगभग 5000 पेड़ों सहित किसी भी उम्र या प्रजाति का कोई भी पेड़, अगली सुनवाई की तारीख तक कोर्ट की पूर्व अनुमति के बिना नहीं काटा जाएगा। NHAI ने भी कोर्ट को आश्वासन दिया कि जब तक आगे के आदेश नहीं दिए जाते, तब तक इस परियोजना के लिए कोई भी पेड़ नहीं काटा जाएगा।

Case Title: Sunil Kumar Sharma and others Vs. Union of India & Ors. [CM-156-CWPIL-2026 & CWP-PIL-70-2026]

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