सीआरपीसी की धारा 102 - अपराध का संदेह पैदा करने वाली परिस्थितियां पाए जाने पर ही पुलिस अधिकारी को किसी संपत्ति जब्त करने का अधिकार दिया गया है: हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट

Update: 2023-03-10 15:40 GMT

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने गुरुवार को एक आरोपी के खाते पर रोक लगाने का आदेश देते हुए कहा कि सीआरपीसी की धारा 102 ( पुलिस अधिकारी को कुछ संपत्ति को जब्त करने की शक्ति) एक शर्त के अस्तित्व पर पुलिस अधिकारी को कुछ संपत्ति को जब्त करने का अधिकार देती है, जो कि उक्त संपत्ति पर कथित रूप से चोरी की होने का संदेह है या जो ऐसी परिस्थितियों में पाई जा सकती है जो किसी अपराध के होने का संदेह पैदा करता है।

जस्टिस विवेक सिंह ठाकुर ने उस याचिका पर सुनवाई करते हुए यह टिप्पणी की, जिसमें याचिकाकर्ता ने भारतीय स्टेट बैंक में अपने बचत बैंक खातों को रिलीज़ करने/डी-फ्रीज करने के लिए मजिस्ट्रेट द्वारा उसके आवेदन को खारिज करने के खिलाफ अदालत का दरवाजा खटखटाया था।

याचिकाकर्ता ने सीआरपीसी की धारा 457 के तहत याचिकाकर्ता के खाता नंबरों को रिलीज़/डी-फ्रीज करने के लिए ट्रायल कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था, लेकिन उक्त आवेदन को मजिस्ट्रेट ने इस आधार पर खारिज कर दिया कि जांच लंबित है।

पीठ ने रिकॉर्ड की जांच करते समय कहा कि प्रतिवादी-जांच एजेंसी ने जांच पूरी कर ली है और जांच के निष्कर्ष के अनुसार, याचिकाकर्ता द्वारा कोई अपराध नहीं किया गया और इसलिए रद्द करने की रिपोर्ट तैयार की गई और पुनरीक्षण और सत्यापन के लिए विधि अधिकारी को प्रस्तुत की गई।

पीठ ने आगे कहा कि उक्त कैंसिलेशन रिपोर्ट को लॉ ऑफिसर द्वारा कुछ टिप्पणियों के साथ वापस कर दिया गया और जांच एजेंसी के अनुसार लॉ ऑफिसर द्वारा उठाई गई आपत्तियों को दूर करने के लिए कदम उठाए जा रहे हैं और जांच अभी पूरी होनी बाकी है।

बेंच ने इस सवाल का जवाब देने के लिए कि क्या याचिकाकर्ता के खाते को फ्रीज में रखा जा सकता है या नहीं, कहा कि दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 102 पुलिस अधिकारी को कुछ शर्तों के होने पर कुछ संपत्ति को जब्त करने का अधिकार देती है। जो पूर्व-अपेक्षित है, ऐसी संपत्ति को जब्त करने के लिए पुलिस अधिकारी को सशक्त बनाया गया है। वह किसी भी संपत्ति को जब्त कर सकता है, लेकिन उक्त संपत्ति ऐसी संपत्ति होनी चाहिए जिसे कथित तौर पर या चोरी होने का संदेह हो या जो ऐसी परिस्थितियों में पाई जा सकती है जो किसी अपराध के होने का संदेह पैदा करती है।

पीठ ने पाया कि किसी भी अपराध का होना या अपराध के आरोप लगाना किसी व्यक्ति के खातों को फ्रीज करने के लिए पर्याप्त नहीं है, सिवाय कानून के तहत अनुमति के और वह भी तब जब जांच की ऐसी लंबितता अनंत अवधि तक फैली हो। विशेष रूप से जब संपत्ति न तो संदिग्ध चोरी की संपत्ति है और न ही संपत्ति, यानी बैंक खातों और अभियुक्तों द्वारा कथित अपराध के बीच कोई संबंध है।

उपरोक्त परिस्थितियों में न्यायालय ने पाया कि याचिकाकर्ता के बैंक खातों को जब्त करने के लिए पुलिस अधिकारी को सशक्त बनाने के लिए सीआरपीसी की धारा 102 की कोई भी सामग्री मौजूद नहीं है और न ही अपराध के बीच जांच एजेंसी द्वारा किसी भी सांठगांठ या लिंक को इंगित किया गया है।

पीठ ने पाया कि याचिकाकर्ता अपने उल्लिखित खातों को डी-फ्रीज करने और कानून के अनुसार उन्हें संचालित करने के लिए हकदार है, बशर्ते इन बैंक खातों को फ्रीज करने के समय बैंक खातों में जमा राशि के लिए व्यक्तिगत बांड प्रस्तुत किया जाए।


केस टाइटल: अनीता अग्रवाल बनाम हिमाचल प्रदेश राज्य

साइटेशन : 2023 लाइवलॉ (एचपी) 14

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