सुवेंदु अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई की मांग, चुनावी रैली में लगाए थे 'धर्मनिरपेक्षता मुर्दाबाद, नास्तिकता मुर्दाबाद' के नारे

Update: 2026-04-17 05:00 GMT

कलकत्ता हाईकोर्ट में एक याचिका दायर की गई, जिसमें विपक्ष के नेता सुवेंदु अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई। यह कार्रवाई कोलकाता में एक जनसभा के दौरान उनके द्वारा कथित तौर पर दिए गए भड़काऊ और असंवैधानिक बयानों को लेकर मांगी गई। याचिकाकर्ता का तर्क है कि ऐसे बयान धर्मनिरपेक्षता को कमजोर करते हैं और सांप्रदायिक सौहार्द के लिए खतरा पैदा करते हैं।

याचिकाकर्ता सौमो मंडल भारत के चुनाव आयोग (ECI) को यह निर्देश देने की मांग कर रहे हैं कि वह भवानीपुर निर्वाचन क्षेत्र से अधिकारी की उम्मीदवारी रद्द कर दे। इसी सीट से अधिकारी मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के खिलाफ चुनाव लड़ रहे हैं।

याचिका के अनुसार, अधिकारी वर्तमान में पश्चिम बंगाल विधानसभा में विपक्ष के नेता के रूप में एक उच्च संवैधानिक पद पर आसीन हैं। उन्होंने 3 मार्च, 2026 को कोलकाता के भवानीपुर के पास आयोजित राजनीतिक रैली में भाषण दिया था। इस रैली में, एक विशाल जनसमूह के सामने उन्होंने कथित तौर पर "धर्मनिरपेक्षता मुर्दाबाद, नास्तिकता मुर्दाबाद" जैसे नारे लगाए।

याचिका में यह दावा किया गया कि किसी संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति द्वारा दिए गए बयानों का काफी महत्व होता है और उनमें सार्वजनिक व्यवस्था, संवैधानिक शासन, तथा देश की एकता और अखंडता को प्रभावित करने की क्षमता होती है।

याचिकाकर्ता ने उसी भाषण के दौरान अधिकारी द्वारा दिए गए एक अन्य बयान की ओर भी ध्यान आकर्षित किया, जिसमें उन्होंने कथित तौर पर कहा था कि वह "हिंदुओं के विधायक" हैं। "हिंदुओं ने ही उन्हें विधायक बनाया है।"

यह तर्क दिया गया कि ऐसे बयान प्रकृति में विभाजनकारी हैं और धर्मनिरपेक्षता के संवैधानिक मूल्यों का उल्लंघन करते हैं—विशेष रूप से तब, जब ऐसे बयान किसी सार्वजनिक पद पर आसीन व्यक्ति द्वारा दिए जाते हैं।

याचिका में कहा गया कि 7 अप्रैल, 2026 को संबंधित अधिकारियों को एक अभ्यावेदन (Representation) सौंपा गया, जिसके साथ सार्वजनिक रूप से उपलब्ध कथित वीडियो साक्ष्य भी संलग्न किए गए। हालांकि, इसके बावजूद, अधिकारियों द्वारा कोई कार्रवाई नहीं की गई—जिसमें उम्मीदवारी रद्द करना या कानून के अनुसार विधिक कार्यवाही शुरू करना शामिल है। याचिकाकर्ता का दावा है कि अधिकारियों की यह निष्क्रियता न्यायिक हस्तक्षेप की मांग करती है।

Tags:    

Similar News