बोधगया रोड जाम मामले में मंत्री संतोष मांझी को राहत, हाइकोर्ट ने संज्ञान आदेश रद्द किया

Update: 2026-02-06 08:16 GMT

पटना हाइकोर्ट ने वर्ष 2017 के बोधगया रोड जाम और विरोध प्रदर्शन से जुड़े एक आपराधिक मामले में बिहार सरकार के लघु जल संसाधन मंत्री संतोष मांझी को बड़ी राहत दी।

हाइकोर्ट ने गया के मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी द्वारा वर्ष 2021 में पारित संज्ञान आदेश को मंत्री संतोष मांझी के संबंध में रद्द किया।

यह मामला बोधगया थाना कांड संख्या 199/2017 से जुड़ा है, जिसमें सड़क जाम, पुलिस अधिकारी पर हमला और एक महिला से छेड़छाड़ के आरोप लगाए गए। संतोष मांझी, जो केंद्रीय मंत्री और पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी के पुत्र हैं, उन्होंने इस संज्ञान आदेश को हाइकोर्ट में चुनौती दी थी।

मामले की सुनवाई जस्टिस संदीप कुमार ने की। अपने आदेश में जस्टिस ने स्पष्ट कहा कि प्राथमिकी और रिकॉर्ड में उपलब्ध तथ्यों से यह सामने आता है कि याचिकाकर्ता के खिलाफ किसी भी तरह के मारपीट या हिंसा का कोई सीधा आरोप नहीं है।

अदालत ने माना कि FIR के अनुसार संतोष मांझी केवल सभा को संबोधित कर रहे थे जो अपने आप में उनके खिलाफ आपराधिक मामला बनाने के लिए पर्याप्त नहीं है।

हाइकोर्ट ने कहा कि ऐसी स्थिति में अभियोजन का मामला याचिकाकर्ता के खिलाफ टिकाऊ नहीं है। इसके साथ ही अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि संज्ञान आदेश बिना समुचित विचार के पारित किया गया।

नतीजतन हाइकोर्ट ने 12 फरवरी, 2021 को पारित संज्ञान आदेश को संतोष मांझी के संबंध में रद्द कर दिया।

याचिकाकर्ता की ओर से यह दलील दी गई कि उन्हें राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता के कारण झूठे मामले में फंसाया गया। यह भी कहा गया कि वे केवल जनसभा को संबोधित कर रहे थे और किसी भी अवैध या हिंसक गतिविधि में उनकी कोई भूमिका नहीं थी।

वहीं राज्य सरकार की ओर से याचिका का विरोध किया गया लेकिन यह स्वीकार किया गया कि संतोष मांझी के खिलाफ केवल यही आरोप है कि वे सभा को संबोधित कर रहे थे।

मामले की पृष्ठभूमि के अनुसार बोधगया थाना प्रभारी ने स्वयं बयान देकर FIR दर्ज कराई। इसमें कहा गया कि उन्हें डोमुहाने चौक पर सड़क जाम की सूचना मिली थी। मौके पर पहुंचने पर कुछ लोग टायर जलाकर प्रदर्शन कर रहे थे और लाठी-डंडे से लैस थे।

।आरोप था कि संतोष मांझी सहित कुछ अन्य लोग लाउडस्पीकर से भीड़ को संबोधित कर रहे थे और एक पुराने मामले में गिरफ्तारी न होने के विरोध में प्रदर्शन किया जा रहा था।

प्राथमिकी में आगे आरोप लगाया गया कि कुछ लोगों के उकसावे के बाद एक बुर्का पहनी महिला का अपमान किया गया और बाद में थाना प्रभारी संजय कुमार पर हमला हुआ जिसमें उन्हें सिर और हाथ में चोट आई। इसके अलावा कुछ असामाजिक तत्वों द्वारा एक टेंपो पर हमला किए जाने का भी आरोप था।

हालांकि हाइकोर्ट ने यह स्पष्ट कर दिया कि इन घटनाओं के लिए संतोष मांझी की प्रत्यक्ष भूमिका दर्शाने वाला कोई ठोस आरोप या साक्ष्य रिकॉर्ड पर नहीं है। इसी आधार पर उन्हें इस आपराधिक मामले में राहत दी गई।

यह आदेश केवल संतोष मांझी तक सीमित है और अन्य आरोपियों के संबंध में मामला अपने स्तर पर जारी रहेगा।

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