नेशनल लॉ स्कूल ऑफ़ इंडिया यूनिवर्सिटी (NLSIU) की 'लॉ एंड सोसाइटी कमिटी' (LawSoc) ने ललित वचानी की डॉक्यूमेंट्री 'प्रिजनर नंबर 626710 इज़ प्रेजेंट' (Prisoner No. 626710 is Present) की स्क्रीनिंग टाल दी। यह डॉक्यूमेंट्री उमर खालिद की जेल की सज़ा पर बनी है। यह कार्यक्रम 14 सितंबर को यूनिवर्सिटी में होना था और इसके बाद चर्चा भी होनी थी।

देर रात एक अपडेट में LawSoc ने छात्रों को ईमेल भेजकर कार्यक्रम टालने की घोषणा की। इसके लिए 'लॉजिस्टिकल और सुरक्षा कारणों' का हवाला दिया गया, हालांकि यह भी साफ़ किया गया कि कार्यक्रम इसी ट्राइमेस्टर में आयोजित किया जाएगा।

LawSoc ने आगे साफ़ किया कि वे 'किसी के दबाव' में आकर कार्यक्रम से पीछे नहीं हट रहे हैं। ईमेल में कहा गया कि स्क्रीनिंग को 'सुरक्षित और ज़िम्मेदार तरीके से' आयोजित करने के लिए इसे टाला गया।

कमिटी ने पुष्टि की कि वे 'छात्र समुदाय की भलाई से समझौता किए बिना' ज़रूरी इंतज़ाम करने के लिए काम कर रहे हैं।

LawSoc ने संवैधानिक अधिकारों, आपराधिक कानून, नागरिक स्वतंत्रता और संस्थागत आज़ादी में रुचि रखने वाले छात्रों को नए समय पर होने वाले कार्यक्रम में शामिल होने के लिए प्रोत्साहित भी किया।

बता दें, छात्रों को भेजे गए LawSoc के शुरुआती ईमेल के अनुसार, यह स्क्रीनिंग 13 सितंबर को मनाए जाने वाले 'राजनीतिक कैदी दिवस' (Political Prisoners Day) के मौके पर आयोजित की जानी थी।

ईमेल के अनुसार, कमिटी का मकसद स्क्रीनिंग के ज़रिए व्यापक कानूनी सवालों पर चर्चा को बढ़ावा देना था, जैसे कि ट्रायल से पहले हिरासत (Pre-Trial Detention), ज़मानत, असहमति, राजनीतिक कैद और आपराधिक कानून व लोकतांत्रिक आज़ादी के बीच संबंध। आयोजक के ईमेल में यह भी बताया गया था कि सितंबर में उमर खालिद की जेल की सज़ा के छह साल पूरे हो रहे हैं।

इस प्रस्तावित कार्यक्रम का अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) ने विरोध किया। ABVP ने शनिवार को NLSIU के वाइस चांसलर को पत्र लिखकर प्रशासन से आग्रह किया था कि वे शैक्षणिक जगहों का इस्तेमाल 'राजनीतिक या वैचारिक प्रचार' के लिए न होने दें। ABVP ने यह भी मांग की कि वाइस चांसलर स्क्रीनिंग की अनुमति न दें, ताकि यूनिवर्सिटी के शैक्षणिक माहौल को राजनीतिक ध्रुवीकरण से बचाया जा सके।

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