बेंगलुरु की सेशंस कोर्ट ने कर्नाटक के गृह मंत्री प्रियांक एम. खड़गे और कांग्रेस नेता मोहम्मद हारिस नलापाद के खिलाफ राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के बारे में कथित मानहानि वाले बयानों को लेकर चल रहे आपराधिक मानहानि केस की आगे की कार्यवाही पर रोक लगाई।

जज केबी शिवप्रसाद ने शिकायत करने वाले संगठन के सदस्य के 'लोकस स्टैंडी' (मुकदमा करने का अधिकार) की जांच करने का फैसला किया।

यह घटनाक्रम खड़गे द्वारा दायर आपराधिक रिवीजन याचिका के बाद हुआ, जिसमें उन्होंने स्पेशल MP/MLA कोर्ट के 27 जून के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें खड़गे और नलापाद के खिलाफ BNS की धारा 356 के तहत अपराधों का संज्ञान लिया गया था।

सेशंस कोर्ट ने कहा कि मजिस्ट्रेट ने इस दलील पर विचार किए बिना ही संज्ञान लिया और समन जारी कर दिया कि शिकायतकर्ता 'पीड़ित' व्यक्ति नहीं है।

कोर्ट ने कहा,

"...शिकायत दर्ज करने का अधिकार एक बुनियादी आवश्यकता है। ऐसी स्थिति में सीनियर वकील द्वारा रखी गई दलीलों के आलोक में इस रिवीजन में मजिस्ट्रेट द्वारा पारित आदेश की जांच आवश्यक है... इसलिए यह कोर्ट इस राय पर है कि मजिस्ट्रेट द्वारा पारित आदेश पर सुनवाई की अगली तारीख तक रोक लगाई जानी चाहिए।"

यह देखते हुए कि मजिस्ट्रेट पहले ही समन जारी कर चुके थे और सबूत दर्ज करने की प्रक्रिया शुरू कर चुके थे, कोर्ट ने कहा कि अगर मामले को आगे बढ़ने दिया गया, तो रिवीजन का मकसद ही खत्म हो जाएगा।

बता दें, आपराधिक मानहानि की शिकायत RSS के सदस्य तेजस ए ने दर्ज कराई। उन्होंने आरोप लगाया कि खड़गे ने अक्टूबर 2025 में सोशल मीडिया पोस्ट और अन्य सार्वजनिक बयानों के जरिए RSS और उसके सदस्यों के खिलाफ मानहानि वाले बयान दिए। शिकायत में नलापाद द्वारा YouTube के माध्यम से दिए गए कथित बयानों से जुड़े आरोप भी शामिल थे।

कर्नाटक हाईकोर्ट ने 1 अक्टूबर को खड़गे और नलापाद द्वारा दायर केस रद्द करने की याचिकाओं पर विचार करने से इनकार किया था और उन्हें रिवीजन का कानूनी उपाय अपनाने का सुझाव दिया। इसके बाद आरोपी संज्ञान आदेश रद्द कराने के लिए सेशंस कोर्ट पहुंचे।

इस मामले पर अगली सुनवाई 30 अक्टूबर को होगी।

Case Title : Priyank M Kharge v. Tejas A & Anr Matter

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