NLSIU के पूर्व छात्रों ने CEC के विरोध-प्रदर्शन के दौरान प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पुलिस की कार्रवाई और वकीलों की हिरासत की निंदा की
NLSIU के 500 से ज़्यादा पूर्व छात्रों ने एक बयान जारी कर 10 अक्टूबर को मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विरोध-प्रदर्शन के दौरान देश भर में शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के खिलाफ की गई "मनमानी, गैर-कानूनी और असंवैधानिक" पुलिस कार्रवाई की निंदा की। इस कार्रवाई में पूर्व छात्र और वरिष्ठ वकील शादान फरासत को हिरासत में लेना और उनके साथ बदसलूकी करना भी शामिल है।
उन्होंने कहा कि विरोध करने और विरोध में दूसरों के साथ जुड़ने का अधिकार संविधान के अनुच्छेद 19(1) के तहत गारंटीकृत अधिकार हैं, जो जनहित में "उचित प्रतिबंधों" के अधीन हैं। राज्य मनमाने ढंग से – यहां तक कि आपातकाल के दौरान भी – उन लोगों को हिरासत में नहीं ले सकता, जो इन अधिकारों का इस्तेमाल कर रहे हैं, जैसा कि आज देखा गया, जब देश भर में कथित तौर पर 10,000 से ज़्यादा लोगों को हिरासत में लिया गया।
बयान में कहा गया कि कानूनी सहायता और न्याय तक पहुंच का अधिकार भी संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत एक मौलिक अधिकार है और हिरासत का सामना कर रहे लोगों की मदद करना वकीलों का कर्तव्य है।
सीनियर एडवोकेट शादान फरासत की हिरासत के बारे में बयान में कहा गया:
"हम सुप्रीम कोर्ट के पास शांतिपूर्ण विरोध कर रहे वकीलों के खिलाफ बल प्रयोग और वकीलों को डिटेंशन सेंटर (हिरासत केंद्र) तक जाने से रोके जाने की घटनाओं से बहुत परेशान हैं। हम खास तौर पर सीनियर एडवोकेट और NLSIU (2006 बैच) के पूर्व छात्र मिस्टर शादान फरासत की हिरासत और उनके साथ की गई धक्का-मुक्की से परेशान हैं। उनकी हिरासत के बारे में सबसे ज्यादा चिंताजनक बात यह है कि उन्हें तब हिरासत में लिया गया, जब वे एक शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारी की गैर-कानूनी हिरासत को रोकने के लिए जा रहे हैं।
हम इस बात पर जोर देते हैं कि अगर वकीलों को नागरिकों के मौलिक अधिकारों के इस्तेमाल में मदद करने से रोका गया, तो देश का कानूनी ढांचा चरमरा जाएगा। साथ ही हमें चिंता है कि अगर एक सीनियर एडवोकेट मनमानी पुलिस कार्रवाई का शिकार हो सकते हैं तो एक आम नागरिक कानून से क्या उम्मीद कर सकता है? हम मांग करते हैं कि नागरिकों और वकीलों के खिलाफ अत्यधिक बल प्रयोग, न्याय तक पहुंच से इनकार, और विरोध प्रदर्शनों से निपटने में अधिकारियों और पुलिस की कार्रवाई में उचित संतुलन की कमी की घटनाओं की निष्पक्ष जांच की जाए।"
बयान में नागरिकों और वकीलों के खिलाफ अत्यधिक बल प्रयोग, न्याय तक पहुंच से इनकार और विरोध प्रदर्शनों से निपटने में अधिकारियों और पुलिस की कार्रवाई में उचित संतुलन की कमी की घटनाओं की निष्पक्ष जांच की मांग की गई।