मुंबई सेशंस कोर्ट ने Amazon Seller Services के डायरेक्टर्स के खिलाफ प्लेटफॉर्म पर अबॉर्शन पिल्स बेचने के मामले में रद्द की कार्रवाई
Amazon Seller Services के डायरेक्टर्स को राहत देते हुए मुंबई सेशंस कोर्ट ने हाल ही में मजिस्ट्रेट आदेश रद्द किया, जिसमें Amazon के पोर्टल - amazon.com पर 'बैन' अबॉर्शन पिल्स बेचने से जुड़े एक मामले में डायरेक्टर्स के खिलाफ कार्रवाई शुरू करने का आदेश दिया गया था।
एडिशनल सेशंस जज मुजीबोद्दीन शेख बेंगलुरु के रहने वाले कंदुला राव और नूरीलामिन पटेल द्वारा दायर रिवीजन अर्जी पर सुनवाई कर रहे थे। इस अर्जी में उन्होंने मजिस्ट्रेट कोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें उनके खिलाफ कार्रवाई शुरू करने का आदेश दिया गया।
अभियोजन पक्ष के अनुसार, एक शिकायतकर्ता को Amazon के प्लेटफॉर्म पर - 'Women Abortion Pills' और 'Safe Abort Tablets' - मिलीं। उसने इन्हें ऑर्डर किया और पेमेंट का तरीका 'कैश ऑन डिलीवरी' था। जब उसे ऑर्डर मिला तो उसने 467 रुपये का पेमेंट किया, लेकिन उसे पता चला कि कंपनी ने अबॉर्शन टैबलेट नहीं, बल्कि "a-kare" टैबलेट भेजी थी, जो प्रेग्नेंसी खत्म करने का एक दूसरा विकल्प है।
जब ग्राहक ने कंपनी और Amazon को नोटिस भेजा तो Amazon ने अपने जवाब में यह बात मानी कि उसके प्लेटफॉर्म पर अबॉर्शन पिल्स बेची जा रही थीं, जो कि बैन हैं। फूड एंड ड्रग्स एडमिनिस्ट्रेशन के ड्रग इंस्पेक्टर ने जांच में पाया कि बनाने वाली कंपनी - M/s Gurunanak Enterprises - बिना डॉक्टर के पर्चे के दवाएं बेच रही थी। कई दूसरी गड़बड़ियां भी पाई गईं। इसलिए 'ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट 1940' और 'नियम 1945' के घोर उल्लंघन का आरोप लगाते हुए एक मजिस्ट्रेट के सामने शिकायत दर्ज की गई, जिन्होंने आवेदकों के खिलाफ कार्रवाई शुरू करने का आदेश दिया।
जज ने अपने आदेश में कहा कि Amazon ने M/s Gurunanak Enterprises के साथ एक एग्रीमेंट किया, जो इन प्रोडक्ट्स - 'Women Abortion Pills' और 'Safe Abort Tablets' - को बेचने वाला वेंडर था।
कोर्ट ने 4 फरवरी को जारी किए गए (लेकिन हाल ही में उपलब्ध हुए) अपने आदेश में कहा,
"आवेदक Amazon Seller Services Pvt. Ltd. के डायरेक्टर्स हैं। यह 'सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000' की धारा 2(1)(w) के तहत 'इंटरमीडियरी' (मध्यस्थ) की परिभाषा और दायरे में आता है। इसलिए Amazon 'सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000' की धारा 79 के तहत कानूनी जवाबदेही से छूट पाने का हकदार होगा।"
जज ने कहा कि गुरुनानक वह कंपनी थी जिसने शिकायतकर्ता को विवादित टैबलेट बेचे थे, न कि Amazon के आवेदक डायरेक्टरों ने।
जज शेख ने टिप्पणी की,
"विक्रेता गुरुनानक एंटरप्राइजेज खरीदार/ग्राहक के प्रति जवाबदेह था। Amazon ने M/s. गुरुनानक एंटरप्राइजेज के साथ एक समझौता किया। उस समझौते में विशेष रूप से यह उल्लेख किया गया है कि प्रतिबंधित दवाएं बिक्री के लिए नहीं रखी जानी चाहिए।"
विभिन्न फैसलों का हवाला देते हुए, जो इस मामले पर लागू हो सकते थे, जज ने कहा कि कानून इस प्रकार बिल्कुल स्पष्ट है कि मजिस्ट्रेट को प्रक्रिया जारी करने से पहले एक जांच का आदेश देना चाहिए, खासकर तब जब आवेदक बेंगलुरु में रहते हों, यानी अदालत के अधिकार क्षेत्र से बाहर।
जज शेख ने प्रक्रिया जारी करने वाला आदेश रद्द करते हुए कहा,
"आवेदकों के खिलाफ मजिस्ट्रेट द्वारा पारित विवादित आदेश विकृत और घोर रूप से त्रुटिपूर्ण है। उक्त आदेश अस्पष्ट है, जिसमें कानून पर ठीक से विचार नहीं किया गया। इसलिए इसे न केवल आवेदकों के लिए, बल्कि पूरी तरह से रद्द और निरस्त किया जाना आवश्यक है। अतः, इस न्यायालय का हस्तक्षेप आवश्यक है।"
Case Title: Kandula Raghava Rao vs State of Maharashtra