मनीलाइफ ने दिल्ली कोर्ट का रुख किया, सांडेसरा परिवार से जुड़ी रिपोर्ट हटाने के आदेश को दी चुनौती

Update: 2026-04-14 10:53 GMT

वित्तीय समाचार मंच मनीलाइफ ने दिल्ली कोर्ट में अपील दायर कर उस एकतरफा आदेश को चुनौती दी, जिसमें मनोज केसरीचंद सांडेसरा और उनके परिवार को स्टर्लिंग बायोटेक बैंक घोटाले से जोड़ने वाली रिपोर्ट्स हटाने का निर्देश दिया गया।

यह अपील तीस हजारी कोर्ट में जिला जज विनोद कुमार मीना के समक्ष सूचीबद्ध हुई। मनीलाइफ की ओर से आदेश पर रोक लगाने की मांग की गई, जिस पर अदालत ने नोटिस जारी करते हुए मामले को 29 अप्रैल के लिए सुनवाई हेतु तय किया।

मनीवाइज मीडिया LLP द्वारा दायर इस अपील में ट्रायल कोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी गई, जिसमें गूगल LLC और मेटा प्लेटफॉर्म्स सहित अन्य अज्ञात पक्षों को सांडेसरा से संबंधित सामग्री को हटाने और सर्च परिणामों से डीलिस्ट करने का निर्देश दिया गया।

ट्रायल कोर्ट के सीनियर सिविल जज ने मानहानि वाद लंबित रहने तक संबंधित सामग्री को इंटरनेट से हटाने का आदेश दिया। साथ ही मीडिया संस्थानों को रिपोर्टिंग में सटीकता और निष्पक्षता बरतने तथा सनसनीखेज प्रस्तुति से बचने की नसीहत भी दी थी।

अपील में मनीलाइफ ने तर्क दिया कि उसे सुनवाई की कोई सूचना नहीं दी गई, जबकि उसकी जानकारी सार्वजनिक रूप से उपलब्ध है। संस्था का कहना है कि बिना पक्ष सुने ऐसा आदेश पारित करना प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का स्पष्ट उल्लंघन है।

अपील में कहा गया,

“बिना सुनवाई का अवसर दिए पारित किया गया यह एकतरफा आदेश कानून की दृष्टि से त्रुटिपूर्ण और अस्थिर है।”

मनीलाइफ ने यह भी दलील दी कि इस तरह का व्यापक आदेश न केवल उसकी रिपोर्टिंग को प्रभावित करता है बल्कि इंटरनेट पर उपलब्ध सामग्री के बड़े हिस्से को भी बाधित करता है, जिससे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर असर पड़ता है।

अब इस मामले में आगे की सुनवाई 29 अप्रैल को होगी, जहां अदालत यह तय करेगी कि ट्रायल कोर्ट के आदेश पर रोक लगाई जाए या नहीं।

Tags:    

Similar News