FIR का सामना कर रहे छात्र प्रदर्शनकारियों को कपिल सिब्बल का समर्थन, कानूनी सहायता के लिए दिया 1 करोड़
सीनियर वकील कपिल सिब्बल ने घोषणा की कि उन्होंने CJP (कॉकरोच जनता पार्टी) द्वारा बनाए गए फंड में 1 करोड़ रुपये का योगदान दिया। यह फंड उन प्रदर्शनकारियों को कानूनी सहायता देने के लिए बनाया गया है, जिन्हें दिल्ली पुलिस ने पिछले हफ्ते परीक्षा पेपर लीक के मुद्दे पर जंतर-मंतर पर हुए छात्र प्रदर्शनों के दौरान गिरफ्तार किया।
बता दें, केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद CJP ने 25 जुलाई को प्रदर्शन खत्म किया था। इसके बाद CJP के प्रवक्ता ने बताया कि सरकार के साथ बातचीत के दौरान उन्होंने छात्रों और प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज सभी FIR को वापस लेने और उनके खिलाफ कोई दंडात्मक कार्रवाई न करने की मांग की।
प्रेस कॉन्फ्रेंस में CJP के प्रवक्ता सौरव दास ने कहा कि केंद्र सरकार के आश्वासन के बावजूद देश भर में छात्रों के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज किए जाने की आशंका है।
दास ने कहा कि CJP सीनियर वकील के संपर्क में है ताकि ऐसी मुश्किल स्थिति से निपटा जा सके जहां प्रभावित लोगों को कानूनी सहायता की आवश्यकता हो सकती है।
इस पर प्रतिक्रिया देते हुए सिब्बल ने कहा कि वह कानूनी मदद देने के लिए सहमत हो गए हैं और घोषणा की कि CJP एक वेबसाइट बनाएगी जिसमें उन छात्रों का विवरण होगा जो FIR दर्ज होने के कारण बुरी तरह प्रभावित हुए हैं। इसके अलावा, वेबसाइट उन वकीलों को भी जुड़ने की अनुमति देगी जो प्रो-बोनो (मुफ्त) या अन्यथा सहायता देना चाहते हैं।
उन्होंने कहा:
"मैंने कहा कि भारत में जहां भी शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन हुए हैं, चाहे वह बिहार, असम, बंगाल या महाराष्ट्र हो, और जहां छात्रों या प्रदर्शनकारियों को निशाना बनाया गया है, हमने सरकारों द्वारा दर्ज कानूनी मामलों पर नज़र रखने के लिए एक तंत्र बनाने का फैसला किया ताकि हमारे वकील कानूनी सहायता प्रदान कर सकें। हमने मांग की है कि कोई FIR नहीं होनी चाहिए, और यदि हुई हैं तो उन्हें वापस लिया जाना चाहिए।"
उन्होंने आगे कहा:
"मेरी तरफ से मैंने 1 करोड़ रुपये का योगदान दिया है और मैं पूरे भारत के वकीलों से इस फंड में योगदान देकर मदद करने का आग्रह करता हूं ताकि हम प्रभावित लोगों की मदद कर सकें। हमारे वकील उन लोगों के लिए खड़े हैं, जो कानून के दुरुपयोग से प्रभावित हुए हैं।"
सिब्बल ने अपील की कि छात्रों और प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कोई कानूनी कार्रवाई नहीं होनी चाहिए।