युवा वकील को हिरासत की धमकी देने वाले हाईकोर्ट जज पर कार्रवाई की मांग, BCI ने CJI को लिखा पत्र

Update: 2026-05-06 07:39 GMT

बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) ने आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट के उस जज के खिलाफ तत्काल हस्तक्षेप की मांग करते हुए चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) को पत्र लिखा, जिन्होंने सुनवाई के दौरान आदेश की कॉपी प्रस्तुत न करने पर एक युवा वकील को 24 घंटे पुलिस हिरासत में भेजने का निर्देश दिया था।

हालांकि, बाद में यह आदेश वापस ले लिया गया। फिर भी BCI के अध्यक्ष और सीनियर एडवोकेट मनन कुमार मिश्रा ने इस घटना को गंभीर रूप से चिंताजनक बताया और कहा कि इससे विधि समुदाय में व्यापक चिंता उत्पन्न हुई है।

सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट के जज जस्टिस टी. राजशेखर राव युवा एडवोकेट को फटकार लगाते और पुलिस हिरासत की चेतावनी देते दिखाई दे रहे हैं। बार काउंसिल का कहना है कि वकील द्वारा बार-बार क्षमा मांगने के बावजूद उनके खिलाफ यह कठोर कदम उठाया गया।

बार काउंसिल ने कहा कि यदि घटना का विवरण सही है तो यह न्यायिक संयम, अनुपातिकता, निष्पक्षता और वकीलों की गरिमा से जुड़े गंभीर प्रश्न खड़े करता है। परिषद ने कहा कि वकीलों की त्रुटियों पर कानून के अनुसार कार्रवाई की जा सकती है लेकिन मात्र प्रक्रिया संबंधी चूक के लिए युवा वकील को हिरासत में भेजना प्रथम दृष्टया अत्यंत अनुचित प्रतीत होता है।

पत्र में कहा गया,

“अदालत की गरिमा इस बात से नहीं बढ़ती कि कोई वकील ओपन कोर्ट में दया की भीख मांगे और फिर भी उसे प्रक्रियागत त्रुटि के लिए हिरासत में भेज दिया जाए।”

BCI ने चीफ जस्टिस से अनुरोध किया कि वह मामले का तत्काल संज्ञान लें कार्यवाही की वीडियो रिकॉर्डिंग मंगवाएं और पूरी परिस्थितियों की जांच कराएं।

इसके साथ ही परिषद ने प्रशासनिक कार्रवाई के रूप में संबंधित जज से न्यायिक कार्य वापस लेने और उन्हें किसी दूरस्थ हाईकोर्ट में ट्रांसफर करने तथा न्यायालय प्रबंधन और न्यायिक आचरण संबंधी प्रशिक्षण देने जैसे कदमों पर विचार करने की भी सिफारिश की।

बार काउंसिल ने कहा कि पीठ और बार के बीच संबंध परस्पर सम्मान पर आधारित होते हैं। इस प्रकार की घटनाएं युवा वकीलों पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकती हैं।

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