अधिकार क्षेत्र के बिना मामला दर्ज करने पर लखनऊ DM और ADM पर 20-20 हजार रुपये का जुर्माना

Update: 2026-05-23 07:37 GMT

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अधिकार क्षेत्र के बिना मामला दर्ज करने पर लखनऊ के जिलाधिकारी और अपर जिलाधिकारी (न्यायिक) पर 20-20 हजार रुपये का जुर्माना लगाया। अदालत ने कहा कि अधिकारियों की कार्रवाई कानून के दायरे से बाहर थी और इससे याचिकाकर्ता को अनावश्यक रूप से परेशान होना पड़ा।

जस्टिस पंकज भाटिया ने कहा कि याचिकाकर्ता को अपने अधिकारों की रक्षा के लिए हाईकोर्ट आना पड़ा, जबकि उसके अधिकारों का हनन बिना किसी कानूनी अधिकार के किया गया।

अदालत ने यह भी पाया कि शिकायत एक वकील द्वारा दायर की गई, जिसका संबंधित भूमि से कोई प्रत्यक्ष संबंध नहीं था।

अदालत ने कहा,

“प्रतिवादी संख्या-4 तथा ADM (न्यायिक) और जिलाधिकारी, सभी पर 20-20 हजार रुपये का जुर्माना इसलिए लगाया जाता है, क्योंकि उन्होंने याचिकाकर्ता को अपने अधिकारों की रक्षा के लिए इस अदालत आने को मजबूर किया।”

मामले में एक वकील ने विवादित जमीन को लेकर याचिकाकर्ता को पत्र लिखकर आरोप लगाया कि जमीन पर अवैध निर्माण और गतिविधियां हो रही हैं। यह भी दावा किया गया कि जमीन की खरीद अवैध तरीके से हुई है और राजस्व अभिलेखों के आधार पर इसे साबित किया जा सकता है।

याचिकाकर्ता द्वारा पत्र का जवाब नहीं देने पर वकील ने उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता, 2006 की धाराओं 104 और 105 के तहत जिलाधिकारी के समक्ष शिकायत दाखिल की। जिलाधिकारी ने मामले को गुण-दोष के आधार पर तय करने के निर्देश देते हुए ADM (न्यायिक) को भेज दिया।

इसके बाद ADM ने बिना किसी प्रारंभिक संतुष्टि दर्ज किए याचिकाकर्ता को जमीन बेचने या उस पर निर्माण करने से रोक दिया। इस आदेश को याचिकाकर्ता ने हाइकोर्ट में चुनौती दी।

अदालत ने कहा कि ऐसे मामलों में विधि के अनुसार पहले लेखपाल की रिपोर्ट तहसील स्तर पर प्रस्तुत होती है। फिर उपजिलाधिकारी पक्षकारों को सुनकर आदेश पारित करते हैं। हालांकि, इस मामले में जिलाधिकारी ने सीधे शिकायत स्वीकार की, जबकि उनके पास ऐसा करने का अधिकार ही नहीं था।

हाईकोर्ट ने कहा,

“जिलाधिकारी ने यह जांचने की भी जरूरत नहीं समझी कि उनके पास अधिकार क्षेत्र है या नहीं। वहीं ADM (न्यायिक) ने बिना किसी विचार और संतुष्टि के ऐसा आदेश पारित किया, जिससे याचिकाकर्ता को कठिनाई उठानी पड़ी।”

अदालत ने यह भी कहा कि याचिकाकर्ता का नाम पहले से राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज था और उसे बिना कारण परेशान किया जा रहा था। कोर्ट के अनुसार, वकील ने अपनी कानूनी जानकारी और प्रभाव का दुरुपयोग करते हुए विकास कार्यों में बाधा डालने की कोशिश की।

इन्हीं टिप्पणियों के साथ हाईकोर्ट ने याचिका स्वीकार करते हुए जिलाधिकारी और ADM (न्यायिक) पर 20-20 हजार रुपये का जुर्माना लगाया।

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