'सूचना तक पहुंचने में बाधा': दिल्ली हाईकोर्ट ने श्रम विभाग को कर्मचारी मुआवजा आयुक्तों द्वारा पारित आदेशों को साइट पर अपलोड करने का निर्देश दिया
दिल्ली हाईकोर्ट ने दिल्ली सरकार के श्रम विभाग को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया कि कर्मचारी मुआवजा आयुक्तों द्वारा पारित आदेश श्रम विभाग के पोर्टल पर तीन या चार कार्य दिवसों की अवधि के भीतर अपलोड किए जाए।
न्यायमूर्ति प्रतिभा एम सिंह ने कहा कि उक्त निर्देश का पालन न करने से सख्ती से निपटा जाएगा।
अदालत ने कहा,
"इस तरह की घटनाएं अधिकारियों के समक्ष कार्यवाही से संबंधित जानकारी तक पहुंच को गंभीर रूप से बाधित करती हैं। आदेशों के कार्यान्वयन में देरी करती हैं और पक्षकारों को कानूनी उपायों का लाभ उठाने से रोकती हैं।"
कोर्ट एक कंपनी द्वारा दायर एक याचिका पर विचार कर रहा था। याचिका में आरोप लगाया गया कि आयुक्त, कर्मचारी मुआवजा, नई दिल्ली के समक्ष कार्यवाही में आदेश के साथ उसे कभी भी तामील नहीं किया गया।
अदालत के निर्देशों के अनुसार, दिल्ली सरकार के अतिरिक्त श्रम आयुक्त ने एक हलफनामा दायर कर कहा कि उसने एक आदेश जारी कर सभी आयुक्त कर्मचारी मुआवजे को आदेश की सॉफ्ट कॉपी सिस्टम विश्लेषक को श्रम विभाग की वेबसाइट पर अपलोड करने के लिए भेजने का निर्देश दिया।
इसे देखते हुए कोर्ट ने कहा:
"इस प्रकार, इस न्यायालय द्वारा पारित आदेशों के अनुसार, तीन से चार दिनों के भीतर आदेशों को अपलोड करने के लिए कदम उठाए गए हैं। आदेशों को अपलोड करना आवश्यक है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि वादी और वकील बिना किसी असुविधा के आदेश देखने और प्राप्त करने में सक्षम हैं।"
कोर्ट ने आगे कहा,
"तदनुसार यह निर्देश दिया जाता है कि विभाग यह सुनिश्चित करे कि कर्मचारी मुआवजा आयुक्तों द्वारा पारित आदेशों को श्रम विभाग के पोर्टल पर तीन से चार कार्य दिवसों के भीतर अपलोड किया जाए।"
अब इस मामले की सुनवाई 3 दिसंबर को होगी।
शीर्षक: एमएस कमला भेल सीओ प्राइवेट लिमिटेड बनाम सुनीता मेहता एंड अन्य।
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