गुजरात कोर्ट ने राहुल गांधी को मानहानि मामले में कोर्ट में व्यक्तिगत उपस्थिति से स्थायी छूट दी

Update: 2020-10-28 08:40 GMT

 अहमदाबाद में मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट की अदालत ने मंगलवार (27 अक्टूबर) को कांग्रेस नेता और वायनाड (केरल) से संसद सदस्य राहुल गांधी को एक आपराधिक मानहानि मामले में उपस्थिति से स्थायी रूप से छूट दे दी

गौरतलब है कि इस मामले में उन्हें केंद्रीय गृह मंत्री अमित पर टिप्पणी करने के चलते मुक़दमे का सामना करना पड़ रहा है।

अतिरिक्त मुख्य मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट आर.बी. इतालिया ने गांधी की याचिका पर उन्हें आपराधिक मानहानि मामले में उपस्थिति से स्थायी छूट की अनुमति दी है।

राहुल गांधी के खिलाफ मामला

दरअसल मध्य प्रदेश के जबलपुर (2019 लोकसभा चुनाव से पहले) में एक चुनावी रैली को संबोधित करते हुए, राहुल गांधी ने अमित शाह को, "हत्या का आरोपी" कहा था। उन्होंने आगे कहा था "वाह क्या शान है!!"

वर्तमान मामले में, बीजेपी के नगरसेवक कृष्णवदन ब्रह्मभट्ट ने शिकायत दर्ज की कि गांधी द्वारा इस्तेमाल की गई टिपण्णी का कोई औचित्य नहीं बनता क्योंकि शाह को वर्ष 2015 में सोहराबुद्दीन शेख फर्जी मुठभेड़ मामले में दोषमुक्त कर दिया गया है।

जनवरी 2020 में, गांधी अदालत में पेश हुए और उन्होंने स्वयं को ट्रायल की इच्छा जाहिर की। इसके बाद, उन्हें जमानत दे दी गई।

स्थायी छूट के लिए याचिका

मंगलवार को, राहुल गांधी के लिए पेश होने वाले वकील, पीएस चंपानेरी ने अदालत के समक्ष यह प्रस्तुत किया कि उनके मुवक्किल राहुल गांधी एक राष्ट्रीय राजनीतिक दल के नेता हैं और उनका व्यस्त कार्यक्रम रहता है, जिसके कारण उनके लिए अदालत के समक्ष ट्रायल के दौरान पेश होना संभव नहीं होगा।

यह ध्यान दिया जा सकता है कि सितंबर 2019 में, राहुल गांधी ने पहली बार इस याचिका को उठाया था और अदालत के सामने पेश होने से स्थायी छूट मांगी थी।

कोर्ट का आदेश

अभियुक्त राहुल गाँधी के लिए पेश होने वाले वकील ने अदालत के सामने यह प्रस्तुत किया कि राहुल गाँधी के लिए दिन-प्रतिदिन की अदालती कार्यवाही में भाग लेना संभव नहीं है क्योंकि वह एक राष्ट्रीय नेता हैं और उनका व्यस्त कार्यक्रम होता है।

उन्होंने न्यायालय के समक्ष यह भी तर्क दिया कि उन्हें अपने वकील के माध्यम से पेश होने की अनुमति दी जानी चाहिए, और उन्हें मामले में अदालत की उपस्थिति से स्थायी छूट दी जानी चाहिए।

मेट्रोपॉलिटन कोर्ट, ने भास्कर इंडस्ट्रीज लिमिटेड बनाम भिवानी डेनिम एंड अपेरल्स लिमिटेड (2001) 7 एससीसी 401 [सुप्रीम कोर्ट], जयंतीलाल छगनलाल पांचाल बनाम शिरीष शांतिलाल पंड्या एवं अन्य (1986) 1 जीएलआर 287 [गुजरात हाईकोर्ट], टीजीएन कुमार बनाम स्टेट ऑफ केरल एवं अन्य [(2011) ) 2 एससीसी 772] [सुप्रीम कोर्ट] और भास्कर सेन बनाम महाराष्ट्र एवं अन्य 2005 (1) ALD Cri 11 [बॉम्बे हाई कोर्ट] मामलों का अवलोकन करने के बाद यह निष्कर्ष निकाला कि अभियुक्त राहुल गांधी के पक्ष में विवेक का इस्तेमाल किया जा सकता है और इस प्रकार, उन्हें अदालत के समक्ष व्यक्तिगत उपस्थिति से स्थायी छूट दी गई।

लाइव लॉ से बात करते हुए, राहुल गांधी के वकील, एडवोकेट पीएस चंपानेरी ने भी पुष्टि की कि कोर्ट का विचार था कि राहुल गांधी को अदालती पेशी से छूट दी जा सकती है और इस निष्कर्ष पर पहुंचने के लिए, अदालत ने सीआरपीसी की धारा 205 और 317 के प्रावधानों को भी ध्यान में रखा।

एडवोकेट पीएस चंपानेरी ने लाइव लॉ को यह भी बताया कि यह मामला एक समन्स केस है, राहुल गांधी व्यक्तिगत रूप से या अपनी याचिका के माध्यम से अदालत के समक्ष पेश हो सकते हैं, जो अदालत के विवेक के अधीन है और इस मामले में राहुल गांधी के पक्ष में अदालत ने अपने विवेक का इस्तेमाल किया है।

वर्तमान मामले में, चूंकि कोर्ट ने अब राहुल गांधी को व्यक्तिगत उपस्थिति से छूट दे दी है तो अब अदालत उनके वकील की उपस्थिति में साक्ष्य दर्ज कर सकेगी।

गौरतलब है कि कोर्ट ने उन्हें निम्नलिखित शर्तों पर व्यक्तिगत उपस्थिति से स्थायी छूट दी है: -

• अभियुक्त अपनी पहचान पर विवाद नहीं करेगा

• वह न्यायालय के समक्ष आपत्ति नहीं उठाएगा कि उसकी अनुपस्थिति में मामले में साक्ष्य दर्ज किए गए थे

• अभियुक्त का अधिवक्ता प्रत्येक सुनवाई पर न्यायालय के समक्ष उपस्थित रहेगा और वह स्थगन के लिए नहीं कहेगा

• अभियुक्त का अधिवक्ता परीक्षण के संचालन के उद्देश्य से समय-समय पर अभियुक्त से आवश्यक निर्देश लेता रहेगा।

आदेश की प्रति डाउनलोड करें



Tags:    

Similar News