निष्कासन अभियान: गुवाहाटी हाईकोर्ट ने असम में आश्रय शिविरों की संख्या पर रिपोर्ट मांगी

Update: 2023-04-24 05:06 GMT

Gauhati High Court

गुवाहाटी हाईकोर्ट ने स्वत: जनहित याचिका में असम सरकार से पूरे राज्य में अस्थायी आश्रय शिविरों की सही संख्या के बारे में रिपोर्ट मांगी, जिसमें बेदखली अभियान के कारण विस्थापित हुए लोगों को रखा जा रहा है।

चीफ जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस मृदुल कुमार कलिता की खंडपीठ ने आगे निर्देश दिया:

"आंकड़ों में लिंग-वार वितरण के साथ-साथ इन सभी शिविरों में आश्रय प्राप्त बच्चों की संख्या भी शामिल होगी।"

इससे पहले अदालत ने सीनियर एडवोकेट बी.डी. कोंवर को इस मामले में एमिक्स क्यूरी के रूप में कार्य करने और चांगमाजी गांव, मौजा-जमुनामुख, उप-मंडल-डबोका, जिला-होजई में अस्थायी आश्रय स्थल का निरीक्षण करने के लिए कहा गया।

कोंवर ने अपनी रिपोर्ट में इस बात पर प्रकाश डाला कि शिविर में पेयजल की उचित सुविधा का अभाव है। रिपोर्ट ने आगे संकेत दिया कि तत्काल उपचारात्मक उपाय के रूप में शिविर में ठीक से फ़िल्टर्ड पानी की आपूर्ति की आवश्यकता है।

अदालत ने निर्देश दिया कि संबंधित अधिकारी रिपोर्ट में उजागर किए गए मुद्दों का तुरंत समाधान करेंगे।

अदालत ने कहा,

“शिविर में पीने योग्य पानी की आपूर्ति तुरंत शुरू की जाएगी। विस्थापित परिवारों के पुनर्वास के लिए उठाए गए/उठाए जाने वाले कदमों को राज्य की ओर से दायर किए जाने वाले जवाबी हलफनामे में भी विस्तार से बताया जाएगा।'

अदालत ने राज्य को दस दिनों के भीतर आवश्यक विवरण के साथ जवाबी हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया।

मामला फिर से 8 मई को सूचीबद्ध किया गया।

केस टाइटल: अस्थायी आश्रय गृहों में बच्चों की पुन: दुर्दशा बनाम असम राज्य

कोरम: चीफ जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस मृदुल कुमार कलिता

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