जोधपुर में पर्यावरण और यातायात प्रबंधन: राजस्थान हाईकोर्ट ने सार्वजनिक फुटपाथ पर 50 वर्ष पुराने मंदिर का पुनर्निर्माण करने पर रोक लगाई

Update: 2020-12-13 05:19 GMT

राजस्थान हाईकोर्ट ने गुरुवार को जोधपुर नगर निगम को सार्वजनिक फुटपाथ और सार्वजनिक रास्ते आदि पर अतिक्रमण न रोक पाने की उसकी विफलता के लिए फटकाई लगाई।

न्यायमूर्ति संगीत लोढ़ा और न्यायमूर्ति रामेश्वर व्यास की खंडपीठ ने यह देखते हुए कि एक नया मंदिर सार्वजनिक फुटपाथ बनाया जा रहा है, संबंधित प्राधिकरण के खिलाफ अवमानना ​​कार्यवाही शुरू करने से इसलिए खुद को रोक लिया, क्योंकि यह आश्वासन दिया गया था कि इस तरह के निर्माण को जल्द ही रोक दिया जाएगा और इसे दो सप्ताह के भीतर हटा दिया जाएगा।

न्यायालय एक रवि लोढ़ा द्वारा दायर अवमानना ​​याचिका पर सुनवाई कर रहा था, जिसमेंं 2007 में राजस्थान राज्य, नगर निगम, जोधपुर और भारतीय रेलवे को उच्च न्यायालय की एक खंडपीठ द्वारा जारी आदेशों का अनुपालन नहींं करने पर कार्रवाई की मांंग की गई थी।

कोर्ट ने विशेष रूप से निर्देश दिया था कि  सड़कों पर खंभे, ट्रांसफार्मर, होर्डिंग्स, केबिन के रूप में अवरोध और सड़क पर अवरोध बन रहे किसी भी धर्म के पूजा स्थल को अन्य स्थान पर स्थापित किया जाए या हटाया जाए।

नवंबर 2019 में वर्तमान अवमानना ​​याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने दोहराया था कि जोधपुर विकास प्राधिकरण और नगर निगम, जोधपुर, फुटपाथ, और सार्वजनिक रास्ते पर किए गए अतिक्रमण को हटाने के लिए और तीन महीने की अवधि के भीतर जोधपुर शहर में केबिन, होर्डिंग्स या फेंस लगाना आदि सभी आवश्यक उपाय करेंगे।

इन निर्देशों के बावजूद बेंच ने देखा कि सड़क से सटे फुटपाथ के हिस्से वाली भूमि पर एक नए मंदिर का निर्माण किया जा रहा है। साइट निरीक्षण के बाद बेंच को सूचित किया गया था कि नए मंदिर का निर्माण एक मौजूदा मंदिर के स्थान पर किया जा रहा है, जिसका निर्माण 50 साल पहले किया गया था, जो शिलालेख से सत्यापित है।

इस बिंदु पर न्यायालय ने यह स्पष्ट किया कि इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि संरचना का निर्माण किसी पुराने स्थल पर किया जा रहा है, क्योंकि वह सार्वजनिक भूमि पर है और निर्देशों के लिए अधिकारियों को मौजूदा स्ट्रकचर को हटाने की आवश्यकता है।

"निर्विवाद रूप से किसी भी धर्म के पूजा स्थल दिखाने वाली संरचनाओं सहित नए निर्माण की अनुमति नहीं देने के निर्देश जारी करते हुए इस मौजूदा ढांचे को स्थानांतरित करने / हटाने के लिए विशिष्ट निर्देश जारी किए गए थे।

इस प्रकार यह मानते हुए कि पूजा स्थल पर कथित तौर पर कुछ संरचना मौजूद थी, फुटपाथ, सार्वजनिक रास्ते या किसी अन्य सार्वजनिक स्थान पर ऐसी किसी भी नई संरचना की अनुमति देने का सवाल ही नहीं उठता। खंडपीठ ने कहा कि हमारे सामने यह विवादित नहीं है कि फूटपाथ पर कथित ढांचा नगर निगम, जोधपुर से अनुमति प्राप्त किए बिना आ रहा है।

यह मामला 15 दिसंबर, 2020 के लिए न्यायालय द्वारा जारी विभिन्न निर्देशों के अनुपालन के संबंध में आगे की सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया गया है।

याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया है कि कोर्ट के 2007 के निर्देशों की घोर अवज्ञा थी, जिसके तहत सड़कों के रखरखाव, यातायात पर नियंत्रण, पार्किंग स्थलों के विकास, खतरनाक उद्योगों के पुनर्वास, अवैध अतिक्रमणों को हटाने पेड़ों के रोपण से संबंधित 18 निर्देश जारी किए गए थे।

याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया कि उपरोक्त 18 निर्देशों के बावजूद,

शहर में सीवरेज प्रणाली विफल हो गई;

निजी बसों को शहर के भीड़भाड़ वाले स्थानों पर खड़ी करने की अनुमति दी गई;

आवासीय और वाणिज्यिक परिसरों के मालिकों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई,जो दुकानों / गोदामों और अन्य वाणिज्यिक गतिविधियों के लिए पार्किंग स्थानों का उपयोग कर रहे थे;

शहर में यातायात को नियंत्रित करने के लिए कोई मास्टर प्लान तैयार नहीं किया गया;

यातायात विभाग में अधिकारियों और कर्मचारियों की भारी कमी,  परिणामस्वरूप उचित प्रशिक्षण दिए बिना यातायात को नियंत्रित करने के लिए होमगार्ड तैनात किए जा रहे थे।

याचिकाकर्ता के पिता द्वारा दायर याचिका पर उच्च न्यायालय ने 2007 के निर्देश पारित किए थे। 

केस का शीर्षक: रवि लोढ़ा बनाम सीएस राजन एंड अदर्स

आदेश की प्रति डाउनलोड करें



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