क्या अधिकारियों ने सुप्रीम कोर्ट के बाहर BNSS की धारा 163 लागू करने से पहले CJI से इजाज़त ली थी?: सीनियर एडवोकेट गोपाल शंकरनारायणन
CEC विरोध मामले की सुनवाई के दौरान, सीनियर एडवोकेट गोपाल शंकरनारायणन ने रविवार को सवाल उठाया कि क्या अधिकारियों ने सुप्रीम कोर्ट के आस-पास BNSS की धारा 163 के तहत रोक लगाने वाला बोर्ड लगाने से पहले चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) से इजाज़त ली थी।
गोपाल एस ने सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता समेत प्रतिवादी पक्ष से पूछा,
"क्या आपने [धारा 163 लागू करने का बोर्ड लगाने के लिए] CJI से इजाज़त ली थी?"
शुरुआत में, SCAORA के अध्यक्ष देवव्रत यादव ने कोर्ट के सामने कहा कि वकीलों के संगठन को सुप्रीम कोर्ट के आस-पास धारा 163 के तहत रोक लगाने के बारे में जानकारी नहीं दी गई। इस बात का हल्के-फुल्के अंदाज़ में जवाब देते हुए जस्टिस बागची ने कहा कि अगर रोक का आदेश ठीक से पब्लिश नहीं किया गया था, तो इसे रद्द करने का यह एक अच्छा आधार होगा।
इसके बाद गोपाल एस ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के बाहर BNSS की धारा 163 लागू करना और इस बारे में बोर्ड लगाना "चौंकाने वाला" था। उन्होंने तर्क दिया कि ऐसी रोक लगाने से पहले सुप्रीम कोर्ट में सक्षम अधिकारी से इजाज़त ली जानी चाहिए थी।
दोनों पक्षों को सुनने के बाद जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की बेंच ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे सुप्रीम कोर्ट के आस-पास के इलाके में BNSS की धारा 163 लागू करने से संबंधित बोर्ड को हटा दें (अगर पहले से नहीं हटाया गया), ताकि न्याय तक पहुंचने, जिसमें किसी भी अदालत में आने-जाने की सुविधा भी शामिल है, को लेकर कोई आशंका न रहे।