दिल्ली हाईकोर्ट ने जामा मस्जिद के आसपास अनधिकृत निर्माण रोकने के लिए एएसआई और नगर निगमों को निर्देश दिया

Update: 2022-04-05 05:08 GMT

दिल्ली हाईकोर्ट ने जामा मस्जिद इलाके में कई "संरक्षित स्मारकों" के आसपास कथित अवैध निर्माण और अतिक्रमण के खिलाफ दायर एक याचिका पर नोटिस जारी किया।

एक्टिंग चीफ जस्टिस विपिन संघ और जस्टिस नवीन चावला की खंडपीठ ने प्रतिवादी अधिकारियों विशेष रूप से उत्तरी दिल्ली नगर निगम, दक्षिणी दिल्ली नगर निगम और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया कि विस्तृत क्षेत्रों में आगे अवैध निर्माण न हो।

इसके अलावा, संबंधित पुलिस स्टेशन के एसएचओ को अदालत के आदेशों का "सख्त अनुपालन" सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया।

उक्त निर्देश मोहम्मद कामरान, सिविलियन वेलफेयर चैरिटेबल ट्रस्ट के अध्यक्ष द्वारा दायर याचिका में आया।

यह आरोप लगाया गया कि प्राचीन स्मारक और पुरातत्व स्थल और अवशेष अधिनियम, 1958 की परवाह किए बिना जामा मस्जिद के आसपास बड़े पैमाने पर अनधिकृत निर्माण चल रहा है। उक्त अधिनिमय संरक्षित स्मारक के 100 मीटर के भीतर निर्माण को प्रतिबंधित करता है।

अदालत ने अपने आदेश में कहा कि याचिकाकर्ता ने कई तस्वीरों को रिकॉर्ड पर रखा है। इन तस्वीरों में स्मारकों की "असभ्य स्थिति" दिखाई दे रही है। साथ ही स्मारकों के आसपास के क्षेत्र में निर्माण किया जा रहा है।

कोर्ट ने एएसआई समेत सभी प्रतिवादियों को नोटिस जारी किया।

अब इस मामले की सुनवाई 14 जुलाई को होगी।

केस शीर्षक: सिविलियन वेलफेयर चैरिटेबल ट्रस्ट बनाम भारत संघ

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