BJP सांसद बांसुरी स्वराज के खिलाफ मानहानिकारक कंटेंट हटाने AAP और सौरभ भारद्वाज: दिल्ली कोर्ट

Update: 2026-04-24 04:29 GMT

दिल्ली कोर्ट ने आम आदमी पार्टी (AAP) और उसके नेता सौरभ भारद्वाज को BJP सांसद बांसुरी स्वराज के खिलाफ हाल ही में हुए राजनीतिक विरोध प्रदर्शन के दौरान उनकी हिरासत से जुड़ा कोई भी मानहानिकारक कंटेंट प्रकाशित करने से रोक दिया।

साकेत कोर्ट के प्रिंसिपल जिला एवं सेशन जज गुरविंदर पाल सिंह ने पार्टी और भारद्वाज को निर्देश दिया कि वह 19 अप्रैल का वीडियो और 21 अप्रैल को प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान दिए गए बयानों को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म - X, Instagram, Facebook और YouTube - से हटा लें और उन्हें आगे न फैलाएं।

AAP और भारद्वाज के अलावा, कोर्ट ने दिल्ली नगर निगम (MCD) में विपक्ष के नेता अंकुश नारंग को भी ऐसा करने से रोक दिया।

कोर्ट ने आदेश दिया कि अगर 48 घंटों के भीतर आदेश का पालन नहीं किया जाता है तो स्वराज कंटेंट को हटवाने के लिए इस आदेश के साथ सीधे सोशल मीडिया इंटरमीडियरीज़ (मध्यस्थों) से संपर्क करने के लिए स्वतंत्र होंगी।

जज ने स्वराज के उस मुकदमे पर यह अंतरिम आदेश पारित किया, जो भारद्वाज द्वारा प्रसारित वीडियो के कारण दायर किया गया। आरोप है कि इस वीडियो में 18 अप्रैल को हुए विरोध मार्च के दौरान स्वराज की हिरासत को गलत तरीके से दिखाया गया।

मुकदमे के अनुसार, वीडियो में झूठा दावा किया गया कि स्वराज ने एक पुलिस अधिकारी का हाथ पकड़कर अपनी हिरासत का नाटक किया था, जबकि असल में वह केंद्रीय मंत्री रक्षा खडसे का हाथ पकड़े हुए थीं।

आरोप लगाया गया कि यह वीडियो, जिसके साथ "भारतीय ड्रामा कंपनी" जैसे कैप्शन लिखे थे, बड़े पैमाने पर शेयर किया गया और बाद में AAP के पदाधिकारियों और खुद पार्टी सहित अन्य सह-प्रतिवादियों द्वारा इसे और अधिक प्रचारित किया गया।

उनके पक्ष में फैसला सुनाते हुए कोर्ट ने टिप्पणी की कि स्वराज की प्रतिष्ठा दांव पर है और यदि उनकी मांग के अनुसार निषेधाज्ञा (रोक लगाने का आदेश) जारी नहीं की जाती है तो उन्हें अपूरणीय क्षति होगी, क्योंकि इससे उनकी प्रतिष्ठा को और अधिक नुकसान पहुंचेगा।

कोर्ट ने कहा,

"भारत के संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत किसी जीवित व्यक्ति की प्रतिष्ठा के अधिकार की बलि किसी अन्य व्यक्ति के बोलने और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के अधिकार की वेदी पर नहीं चढ़ाई जा सकती। इन दोनों अधिकारों के बीच सामंजस्य और संतुलन बनाना आवश्यक है, क्योंकि किसी भी व्यक्ति की प्रतिष्ठा को पहुंचे नुकसान की भरपाई, चाहे कितनी भी क्षतिपूर्ति (मुआवजा) क्यों न दी जाए, नहीं की जा सकती।"

मामले की अगली सुनवाई 13 मई को होगी।

Tags:    

Similar News