समय बीतने के साथ रिश्ते में संदेह पुख्ता होने के बावजूद पीड़िता की सहमति विकृत नहीं हुईः झारखंड हाईकोर्ट

Update: 2022-05-07 03:04 GMT

झारखंड हाईकोर्ट ने हाल ही में कहा है कि भारतीय दंड संहिता की धारा 90 के तहत पीड़िता की सहमति विकृत नहीं हुई। रिश्ते में आया संदेह समय बीतने के साथ मजबूत हो गया, इसके बावजूद पीड़िता की सहमति विकृत नहीं हुई।

भारतीय दंड संहिता की धारा 376 के तहत आरोपी की दोषसिद्धि को रद्द करते हुए, जस्टिस रोंगोन मुखोपाध्याय और जस्टिस राजेश कुमार की खंडपीठ ने कहा कि,

''अगर पीडब्ल्यू-4 के मन में कोई गलतफहमी थी, तो वह रिश्ते के शुरुआती चरण में थी, लेकिन बाद में पीडब्ल्यू-4 का विश्वास मजबूत हो गया, क्योंकि अपीलकर्ता की वैवाहिक स्थिति से अवगत होने के बाद भी उसने कभी भी इस तरह के शारीरिक संबंध का विरोध नहीं किया। ऐसी तथ्यात्मक परिस्थितियां, आईपीसी की धारा 90 को आकर्षित नहीं करेंगी।''

यह अपील तेनुघाट में स्थित अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश-द्वितीय, एफटीसी, बेरमो द्वारा पारित निर्णय और दोषसिद्धि व सजा के आदेश के खिलाफ दायर की गई थी। इस मामले में अपीलकर्ता को भारतीय दंड संहिता की धारा 376 के तहत अपराध के लिए दोषी ठहराया गया था और उसे दस साल के कठोर कारावास व 10000 रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई गई थी।

अपीलकर्ता का अपने परिवार के साथ झगड़ा हुआ था और इस कारण वह घटना से आठ महीने पहले शिकायतकर्ता के घर के एक हिस्से में बतौर किरायेदार रहने लग गया था। आरोपी अक्सर शिकायकर्ता के घर आता-जाता था और उससे शादी करने का वादा करता था। शिकायतकर्ता ने इस वादे के आधार पर आरोपी के साथ शारीरिक संबंध स्थापित किए। जब शिकायतकर्ता के माता-पिता को इसकी जानकारी हुई तो आरोपी को उसके किराए के मकान से बेदखल कर दिया गया। हालांकि, कुछ समय बाद, यह पता चला कि शिकायतकर्ता गर्भवती है, इसलिए उसने शादी करने का अनुरोध किया। लेकिन आरोपी ने इस प्रस्ताव से बचना शुरू कर दिया और शिकायतकर्ता व उसके माता-पिता को धमकी दी।

निचली अदालत के फैसले को रद्द करते हुए हाईकोर्ट ने कहा कि अपीलकर्ता को किराए के घर से बाहर निकाले जाने से पहले वह शिकायतकर्ता के घर पर आठ महीने तक रहा था। सबूतों से पता चला है कि आरोपी ने उससे वादा किया था कि अगर कुछ अनहोनी हुई तो वह उससे शादी कर लेगा। इसके बाद शादी का झांसा देकर शारीरिक संबंध स्थापित किए गए। शिकायतकर्ता ने स्वीकार किया है कि वह अपीलकर्ता की वैवाहिक स्थिति को जानती थी और उसे पता था कि उसके बच्चे भी हैं। हालांकि, उसने उसके साथ यौन संबंध बनाना जारी रखा। उसने यह भी स्वीकार किया है कि किरायेदार के रूप में घर से निकाले जाने के बाद भी उसने उसके साथ यौन संबंध बनाना जारी रखा था।

केस का शीर्षक-कौशर अंसारी बनाम झारखंड राज्य व अन्य

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