महर्षि वाल्मीकि पर कथित टिप्पणी मामले सीनियर जर्नालिस्ट अंजना ओम कश्यप को राहत, हाइकोर्ट ने खारिज की याचिका

Update: 2026-01-19 12:32 GMT

पंजाब एंड हरियाणा हाइकोर्ट ने आज तक चैनल और उसकी सीनियर पत्रकार अंजना ओम कश्यप के खिलाफ दायर जनहित याचिका (PIL) खारिज की। यह याचिका एक कथित वीडियो प्रसारण को लेकर दायर की गई थी, जिसमें यह कहा गया कि भगवान महर्षि वाल्मीकि पहले रत्नाकर नाम के डकैत थे।

याचिकाकर्ता का आरोप था कि इस तरह का कथन भगवान महर्षि वाल्मीकि के प्रति अपमानजनक है, इससे धार्मिक भावनाएं आहत होती हैं और यह एक पूजनीय व्यक्तित्व की छवि को ठेस पहुंचाता है। याचिका में यह भी कहा गया कि इस दावे के समर्थन में कोई ऐतिहासिक तथ्य मौजूद नहीं है।

मामले की सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस शील नागू और जस्टिस संजीव बेरी की खंडपीठ ने याचिकाकर्ता से सवाल किया कि वह इतिहास की बात कर रहे हैं या पौराणिक कथाओं की। हाइकोर्ट ने टिप्पणी की कि पौराणिक विषयों के लिए ठोस ऐतिहासिक प्रमाण उपलब्ध नहीं होते और जब स्वयं याचिकाकर्ता इसे इतिहास का हिस्सा नहीं मानता, तो यह तय करना कठिन है कि प्रसारण सही है या गलत।

हाइकोर्ट ने कहा कि याचिका में कोई ठोस आधार नजर नहीं आता। इसके बाद याचिका को वापस ली गई मानते हुए खारिज कर दिया गया।

याचिका में यह भी दावा किया गया कि पूर्व के कुछ न्यायिक निर्णयों में यह कहा गया कि महर्षि वाल्मीकि के डकैत होने का कोई ऐतिहासिक, धार्मिक या साहित्यिक आधार नहीं है। इस तरह का चित्रण न्यायालय द्वारा स्वीकार की गई सच्चाई के विपरीत है। याचिकाकर्ता ने यह भी आरोप लगाया कि उक्त प्रसारण भारतीय दंड संहिता की धारा 295ए और 153ए, केबल टेलीविजन नेटवर्क नियम, आईटी नियम 2021, एनबीडीएसए की आचार संहिता और अनुसूचित जाति एवं जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम का उल्लंघन करता है।

याचिका में यह भी बताया गया कि 11 अक्टूबर 2025 को सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग और एनबीडीएसए को लिखित शिकायत दी गई थी, लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई।

याचिकाकर्ता ने हाइकोर्ट से मांग की थी कि कथित आपत्तिजनक वीडियो को टीवी, यूट्यूब और सोशल मीडिया से हटाया जाए, सार्वजनिक माफी जारी कराई जाए, संबंधित लोगों के खिलाफ अनुशासनात्मक या कानूनी कार्रवाई हो, भविष्य में इस तरह के प्रसारण रोकने के लिए दिशा-निर्देश जारी किए जाएं और यूट्यूब व फेसबुक/इंस्टाग्राम जैसे प्लेटफॉर्म को सामग्री हटाने के निर्देश दिए जाएं। हालांकि, हाइकोर्ट ने इन मांगों को स्वीकार नहीं किया।

Tags:    

Similar News