बार काउंसिल ऑफ असम, नागालैंड, मिजोरम, अरुणाचल प्रदेश और सिक्किम वित्तीय संकट झेल रहे वकीलों को पांच-पांच हजार रुपये देगी , योजना की अधिसूचना जारी

Update: 2020-04-30 03:30 GMT

बार काउंसिल ऑफ असम, नागालैंड, मिजोरम, अरुणाचल प्रदेश और सिक्किम ने एक बार की जाने वाली वित्तीय सहायता की घोषणा की है। जिसके तहत लॉकडाउन के दौरान अदालत का कामकाज बंद होने के कारण वित्तीय संकट झेल रहे वकीलों को पांच-पांच हजार रुपये दिए जाएंगे।

इस योजना को स्टेट बार काउंसिल ने '' बार काउंसिल ऑफ असम, नागालैंड, मिजोरम, अरुणाचल प्रदेश और सिक्किम COVID-19 वित्तीय सहायता योजना'' नाम दिया है।

इस योजना के तहत लाभ उन अधिवक्ताओं को मिलेगा जिन्होंने बार काउंसिल ऑफ असम, नागालैंड, मिजोरम, अरुणाचल प्रदेश और सिक्किम के साथ अपना नामांकन करवाया हुआ है। वहीं जिनको वित्तीय सहायता की बहुत आवश्यकता है। परंतु यह पैसा बीसीआई द्वारा योजना के अनुमोदन के तहत ही दिया जाएगा।

वित्तीय सहायता के लिए एक आवेदक को निम्नलिखित पात्रता मानदंड पूरे करने होंगे,जो इस प्रकार हैं-

-आवेदक सक्रिय रूप से प्रैक्टिस करता हो।

-उसके पास आय का कोई अन्य स्रोत नहीं होना चाहिए और वह आयकर दाता भी नहीं होना चाहिए। इसके अलावा आवेदक के पास 15 मार्च 2020 तक कुल बचत 30000 रुपये से अधिक नहीं होनी चाहिए।

-उसे कोई भी पेंशन या किसी भी प्रकार की अन्य वित्तीय सहायता न मिलती हो।

-वह अपने माता-पिता पर निर्भर नहीं होना चाहिए और यदि आवेदक शादीशुदा है, तो उसके पति या पत्नी के पास आय, पेंशन या किसी भी प्रकार का कोई स्रोत या अन्य वित्तीय सहायता नहीं होनी चाहिए।

-उसने अखिल भारतीय बार परीक्षा उत्तीर्ण की हो , यदि एआईबीई उसके लिए अनिवार्य है तो।

यह योजना किसी भी सरकारी वकील/परामर्शदाता/ सरकारी अधिवक्ता या प्लीडर/लोक अभियोजक/अतिरिक्त लोक अभियोजक/सहायक लोक अभियोजक/रिटेनर एडवोकेट/अर्ध-सरकारी प्राधिकरण/विश्वविद्यालय/ कॉलेज या नोटरी आदि पर लागू नहीं होगी।

आवेदन

योजना के तहत लाभ प्राप्त करने के लिए एक आवेदन पत्र भरकर (जैसा कि निर्धारित किया गया है) ई-मेल के माध्यम से:barcouncilofnecovid19aid@gmail.com

भेजा जाएगा। या फिर व्यक्तिगत तौर पर जाकर/कुरियर/पोेस्ट के माध्यम से स्टेट बार काउंसिल के अध्यक्ष को संबोधित किया जाए। यह सभी आवेदन 7 मई, 2020 तक प्राप्त हो जाने चाहिए। आवेदन पत्र के साथ आवेदन योजना में निर्धारित दस्तावेज भी साथ भेजे जाएं।

सूची बनाना

आवेदनों की जांच की जाएगी और लाभार्थियों का चयन एक विशेष समिति द्वारा किया जाएगा, जिसमें स्टेट बार काउंसिल के अध्यक्ष सहित छह सदस्य होंगे।

समिति योजना के तहत आवेदक को वित्तीय सहायता के रूप में दी जाने वाली राशि तय करेगी। वहीं उपलब्ध धन की कुल मात्रा को ध्यान में रखते हुए सभी लाभार्थियों को एक निश्चित समय पर यह सहायता दी जाएगी।

सहायता का संवितरण

वित्तीय सहायता की राशि संबंधित चयनित लाभार्थियों के बैंक खातों में एनईएफटी / आरटीजीएस के माध्यम से स्थानांतरित की जाएगी या भेज दी जाएगी, जैसा भी उनके आवेदन पत्रों में वर्णित होगा। आवेदक का बैंक खाता उसके स्वयं के नाम पर होना चाहिए, अन्यथा उसका आवेदन अस्वीकृत हो जाएगा।

यह चेतावनी भी दी गई है कि यदि कोई भी आवेदक इस योजना के उद्देश्यों के लिए गलत बयान प्रस्तुत करता है, तो ऐसे आवेदक के खिलाफ उचित कार्रवाई की जाएगी।

अधिवक्ता अधिनियम, 1961 के तहत राज्य बार काउंसिलों के दायित्वों को पूरा करने के लिए इस योजना को बनाया गया है ताकि अधिवक्ताओं के अधिकारों, विशेषाधिकारों और हितों की रक्षा की जा सकें।

उक्त अधिनियम की धारा 6 (2) (ए) इस बात की पैरवी करती है कि एक राज्य बार काउंसिल अपने क्षेत्र के अधिवक्ताओं को वित्तीय सहायता देने के उद्देश्य से कल्याणकारी योजनाओं के रूप में निर्धारित तरीके से एक या अधिक फंड का गठन कर सकती है।

दिल्ली और राजस्थान की बार काउंसिलों ने भी जरूरतमंद अधिवक्ताओं को पांच-पांच हजार रुपये की वित्तीय सहायता प्रदान करने का निर्णय किया है। इसी तरह बार काउंसिल ऑफ तमिलनाडु और पुदुचेरी ने भी उन सभी जरूरतमंद अधिवक्ताओं को वित्तीय सहायता देने का संकल्प लिया है, जो लाॅकडाउन के कारण अपने दिन-प्रतिदिन के खर्चों को पूरा करने में असमर्थ हैं।

हाल ही में, पश्चिम बंगाल की बार काउंसिल ने भी एक पत्र याचिका की सुनवाई के दौरान कलकत्ता हाईकोर्ट को सूचित किया था कि उन्होंने जरूरतमंद वकीलों को वित्तीय सहायता प्रदान करने का निर्णय लिया है।

इसी से संबंधित एक अन्य समाचार में सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष एक याचिका दायर की गई है, जिसमें आपात काल के दौरान वकीलों को वित्तीय सहायता देने के लिए राष्ट्रीय स्तर पर एक समान योजना बनाने की मांग की गई है। 

अधिसूचना 



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