'COVID-19 टेस्ट रिजल्ट निगोटिव आने पर ही जमानत पर रिहा किया जाएगा': गुजरात हाईकोर्ट ने शर्त रखी

Update: 2021-04-27 08:28 GMT

गुजरात हाईकोर्ट COVID-19 महामारी के संक्रमण को रोकने और इसके लिए सावधानी बरतने को ध्यान में रखते हुए निर्देश दिया कि जिन कैदियों को जमानत की अनुमति मिल गई है उन्हें COVID-19 टेस्ट से गुजरना होगा।

कोर्ट ने कम-से-कम सात जमानत आदेशों में कहा कि,

"यह केवल यहां तक है कि जिस आवेदक का COVID-19 टेस्ट की रिपोर्ट निगेटिव आती है इसे ही इस आदेश का लाभ मिलेगा और उसे अस्थायी जमानत पर रिहा किया जाएगा।"

न्यायमूर्ति आरएम छैया की एकल पीठ और न्यायमूर्ति छैया और न्यायमूर्ति एनवी अंजारिया की खंडपीठ द्वारा जमानत की यह शर्त पारित की गई है।

कोर्ट ने आदेश दिया कि आवेदक को अस्थायी जमानत पर रिहा करने से पहले जेल अधिकारियों को आवेदक का COVID-19 टेस्ट से करवाना होगा और केवल COVID-19 टेस्ट रिजल्ट निगोटिव आने पर ही जमानत आदेश प्रभावी होगा।

कोर्ट आगे आदेश दिया कि जब इस तरह के आवेदक छुट्टी (अस्थायी जमानत) का आनंद लेने के बाद वापस लौटेंगे तो जेल अधिकारी द्वारा उन्हें COVID19 महामारी के संबंधित प्रोटोकॉल के अनुसार क्वारैंटाइन में रखा जाएगा।

यह आदेश COVID-19 महामारी की दूसरी लहर के कारण बढ़टे कोरोना मामलों को मद्देनजर बेहद महत्वपूर्ण है।

गौरतलब है कि गुजरात उच्च न्यायालय ने COVID-19 महामारी की स्थिति पर ध्यान दिया है और प्रचलित मुद्दों के समाधान के लिए स्वत: संज्ञान लेकर कार्यवाही शुरू की।

हाईकोर्ट की सीजे के नेतृत्व वाली खंडपीठ ने अपने नवीनतम आदेश में सरकार को कोविड चैन को तोड़ने के लिए जनता को सचेत करने और शिक्षित करने के लिए कहा है और इसके साथ ही अंततः बढ़ते मामले को स्थिर करना, वक्र को समतल करते हुए और उसके बाद कोरोना मामलों के गिरावट की ओर बढ़ना है।

कोर्ट ने अस्पताल में बेड की उपलब्धता, रेमडेसिविर इंजेक्शन इत्यादि से संबंधित मुद्दों पर भी सुनवाई की और राज्य से जवाब मांगा है। इस मामले पर आज फिर से सुनवाई होगी।

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