राजीव गांधी हत्या मामले के दोषी ए.जी. पेरारिवलन बने वकील, सुप्रीम कोर्ट से रिहाई के बाद कानूनी पेशे में रखा कदम

Update: 2026-04-28 13:19 GMT

पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी हत्या मामले में दोषसिद्ध रहे और बाद में सुप्रीम कोर्ट से रिहा हुए ए.जी. पेरारिवलन ने अब विधि व्यवसाय में प्रवेश किया।

पेरारिवलन का नामांकन तमिलनाडु एवं पुडुचेरी बार काउंसिल में वकील के रूप में किया गया, जिसके बाद वह मद्रास हाईकोर्ट में वकालत कर सकेंगे।

चेन्नई में 27 अप्रैल को आयोजित नामांकन समारोह में पेरारिवलन को वकील के रूप में रजिस्टर्ड किया गया। इसके साथ ही उन्होंने औपचारिक रूप से कानूनी पेशे की शुरुआत कर दी।

पेरारिवलन को राजीव गांधी हत्या प्रकरण में आतंकवादी एवं विध्वंसकारी गतिविधियां (निवारण) कानून के तहत विशेष अदालत ने मृत्युदंड सुनाया था।

वर्ष 1999 में सुप्रीम कोर्ट ने भी उनकी फांसी की सजा बरकरार रखी थी। पुनर्विचार याचिका और दया याचिकाएं खारिज होने के बाद उन्होंने विभिन्न संवैधानिक उपाय अपनाए।

बाद में 2014 में सुप्रीम कोर्ट ने उनकी मृत्युदंड की सजा को आजीवन कारावास में परिवर्तित किया था। इसके पश्चात उन्होंने समयपूर्व रिहाई के लिए आवेदन किया, जिस पर राज्य मंत्रिमंडल ने 2018 में सहमति देकर राज्यपाल को अनुशंसा भेजी थी, लेकिन निर्णय लंबे समय तक लंबित रहा।

आखिरकार 18 मई, 2022 को सुप्रीम कोर्ट ने संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत विशेष अधिकारों का प्रयोग करते हुए पेरारिवलन की रिहाई का आदेश दिया।

अदालत ने माना था कि उनकी समयपूर्व रिहाई याचिका पर निर्णय लेने में अत्यधिक विलंब हुआ है।

कारावास के दौरान पेरारिवलन ने शिक्षा जारी रखी और कई शैक्षणिक पाठ्यक्रम पूरे किए। रिहाई के बाद उन्होंने विधि की पढ़ाई की और वर्ष 2025 में LLB पूर्ण करने के पश्चात अखिल भारतीय बार परीक्षा उत्तीर्ण की, जिससे वह वकील के रूप में नामांकन के पात्र बने।

पेरारिवलन ने कहा कि उनकी लंबी कानूनी लड़ाई ने ही उन्हें कानून की पढ़ाई करने के लिए प्रेरित किया। उनके अनुसार, कानूनी जानकारी के अभाव ने उनके मुकदमे के दौरान कई कठिनाइयां उत्पन्न की थीं। उन्होंने बताया कि अब उनका उद्देश्य मृत्युदंड और मानवाधिकार से जुड़े मामलों पर कार्य करना है।

Tags:    

Similar News