अडानी मानहानि मामला: गुजरात हाईकोर्ट ने पत्रकार परंजॉय गुहा ठाकुरता के खिलाफ जारी किए गए गिरफ्तारी वारंट को निलंबित कर दिया

Update: 2021-01-29 04:44 GMT

गुजरात हाईकोर्ट ने आज (28 जनवरी) को कच्छ के मजिस्ट्रेट द्वारा पत्रकार परंजॉय गुहा ठाकुरता के खिलाफ अडानी समूह द्वारा दायर 2017 मानहानि के मुकदमे के सिलसिले में जारी किए गए गिरफ्तारी के गैर-जमानती वारंट को निलंबित कर दिया।

न्यायमूर्ति बी.एन.करिया की खंडपीठ ने गुहा द्वारा दायर अर्जी पर सुनवाई करते हुए मजिस्ट्रेट के आदेश को रद्द कर दिया और इसके साथ ही कच्छ के मुंद्रा के प्रथम श्रेणी के न्यायिक मजिस्ट्रेट द्वारा पारित 18 जनवरी 2021 के आदेश को रद्द कर दिया।

गुहा के वकील द्वारा खंडपीठ के समक्ष प्रस्तुत किया गया था कि समन या जमानती वारंट जारी किए बिना, ट्रायल कोर्ट ने आवेदक की उपस्थिति को सुरक्षित करने के लिए गुहा के खिलाफ सीधे गैर-जमानती वारंट जारी किया था, जो कानून की नजर में स्वीकार्य नहीं है।

गुहा के वकील ने कहा कि वह एक उपक्रम दायर करेंगे कि वह असफल होने पर आगे की कार्यवाही के लिए ट्रायल कोर्ट के समक्ष मौजूद रहेंगे।

यह देखते हुए कि इस मुद्दे पर विचार की आवश्यकता है, न्यायालय ने प्रतिवादी राज्य को 20 फरवरी 2021 को नोटिस (वापसी योग्य) जारी किया।

अंत में कोर्ट ने कहा कि,

"कच्छ के मुंद्रा के प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट द्वारा दिए गए आदेश को अगली सुनवाई की तारीख तक के लिए निलंबित कर दिया जा रहा है।"

मजिस्ट्रेट का आदेश

भारत के प्रमुख कॉर्पोरेट घरानों में से एक अडानी ने ठाकुरता के खिलाफ मानहानि का मुकदमा एक लेख के मामले में दायर ‌किया था। ठाकुरता उक्‍त आलेख के सह लेखक थे। उक्त आलेख का सह-लेखन ठाकुरता ने तब किया था, जब वह इकोनॉमिक एंड पॉलिटिकल वीकली के संपादक थे। आलेख में आरोप लगाया गया था कि नरेंद्र मोदी की सरकार ने विशेष आर्थिक क्षेत्र के नियमों को बदल दिया, जिससे अडानी समूह को 500 करोड़ रुपए का लाभ हुआ।

न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रदीप सोनी ने गिरफ्तारी का वारंट जारी करते हुए, नई दिल्ली में निजामुद्दीन पुलिस स्टेशन को निर्देशित किया,

"आरोपी (ठाकुरता) को आईपीसी की धारा 500 के तहत आरोपित किया गया है। आपको उक्त आरोपी को गिरफ्तार करने और कोर्ट के समक्ष पेश करने का निर्देश दिया जाता है।"

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