सिस्टर अभया मर्डर केसः केरल उच्‍च न्यायालय ने फादर कोट्टूर की अपील स्वीकार की, सीबीआई को नोटिस दिया

Update: 2021-01-19 13:08 GMT

केरल उच्च न्यायालय ने फादर थॉमस कोट्टूर द्वारा 1992 में सिस्टर अभया की हत्या मामले में उनकी सजा और सजा के खिलाफ दायर अपील को स्वीकार कर लिया है। जस्टिस के विनोद चंद्रन और एम आर अनीथा की खंडपीठ ने सीबीआई को नोटिस जारी किया है। कोट्टूर को विशेष सीबीआई अदालत ने 23 दिसंबर को आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी।

अपील में उन्होंने कहा है ट्रायल अदालत का फैसला " असंबद्ध कहानी परिस्थि‌‌तियों, जिन्हें अविश्वसनीय गवाहों से प्राप्‍त किया गया है" पर आधारित है। यह दलील दी गई है कि ट्रायल अदालत ने फैसले में सबूतों को सच्चाई के साथ उल्ल‌ेख नहीं किया है। अपील में कहा गया है, "निचली अदालत द्वारा अभियुक्तों के खिलाफ चलाए गए मुकदमे और सजा को गंभीर अवैधताओं और अनियमितताओं के जर‌िए बिगाड़ दिया गया है।"।

सीबीआई अदालत ने कोट्टूर और सिस्टर सेफी को 1992 में सेंट पायस टेंथ कॉन्वेंट हॉस्टल, कोट्टायम में हुई सिस्टर अभया की हत्या के लिए सजा सुनाई थी। सीबीआई के विशेष जज के सानिलकुमार ने कोट्टूर और सेफी को हत्या का दोषी पाया था और केन्द्रीय जांच ब्यूरो के मामले को स्वीकार किया था कि सिस्टर अभया की अपराधियों द्वारा हत्या कर दी गई थी जब उन्होंने कॉन्वेंट के भीतर दोनों अंतरंग स्थिति में देख लिया था।

सीबीआई अदालत ने दोषियों को भारतीय दंड संहिता की धारा 302 के तहत हत्या का दोषी पाया और उन्हें आजीवन कारावास की सजा सुनाई। दोषियों पर भारतीय दंड संहिता की धारा 302 के तहत 5 लाख रुपए का जुर्माना भी लगाया गया था। कोट्टूर को धारा 449 आईपीसी के तहत आजीवन कारावास की अतिरिक्त सजा भी दी गई और एक लाख रुपए का जुर्माना भी लगाया गया था। दोषियों को धारा 201 आईपीसी (सबूतों को नष्ट करना) के तहत अपराध के लिए 7 साल के कारावास और 50,000 रुपए का जुर्माना की सजा भी दी गई थी। दोषियों को दी गई कैद की सजा समवर्ती रूप से चलेगी।

सिस्टर अभया 20 साल की नन थीं, जिन्हें 27 मार्च 1992 को कोट्टायम में सेंट पायस टेंथ कॉन्वेंट के कुएं में मृत पाया गया था। इस मामले के पहले आरोपी फादर कोट्टूर, कोट्टायम के बीसीएम कॉलेज में मनोविज्ञान के व्याख्याता थे, जहां सिस्टर अभया छात्रा थी। इस मामले के दूसरे आरोपी, फादर जोस पूथ्रीकायिल, उसी कॉलेज में मलयालम के एक व्याख्याता थे, को 2019 में सबूतों की कमी का हवाला देते हुए रिहा कर दिया गया था। सिस्टर सेफी सेंट पायस टेंथ कॉन्वेंट की रहवासी थीं।

स्थानीय पुलिस और केरल पुलिस की अपराध शाखा ने शुरू में इस मामले को आत्महत्या मानते हुए बंद कर दिया था। हालांकि सार्वजनिक आक्रोश के बाद मामला सीबीआई को सौंप दिया गया था। 2008 तक सीबीआई भी मामले में कोई सफलता नहीं हासिल कर सकी। सीबीआई की अलग-अलग टीमों ने मामले में, 1996, 1999 और 2005 में क्लोजर रिपोर्ट भी दाखिल की थीं। हालांकि, एर्नाकुलम में मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने इन्हें स्वीकार करने से इनकार कर दिया और एजेंसी को आगे की जांच करने के लिए कहा।

एक नवंबर, 2008 को केरल के उच्च न्यायालय ने CBI की कोच्चि इकाई को जांच का निर्देश दिया। इसके तुरंत बाद, 19 नवंबर, 2008 तक, सीबीआई ने फादर थॉमस कोट्टूर, सिस्टर सेफी और फादर जोस पूथ्रीकायिल को गिरफ्तार कर लिया। जुलाई 2009 में, सीबीआई ने फादर थॉमस कोट्टूर, सिस्टर सेफी और फादर जोस पूथ्रीकायिल के खिलाफ हत्या और सबूत नष्ट करने के आरोप में आरोपपत्र दायर किया। रिपोर्ट के अनुसार, सिस्टर अभया ने गलती से सिस्टर सेफी और अन्य दो आरोप‌ियों "आपत्त‌िजनक स्थिति" में देख लिया था।

रिपोर्ट में आगे कहा गया था कि अभया द्वारा देखे जाने से सिस्टर सेफी घबरा गई थीं और उन्होंने उस पर कुल्हाड़ी से हमला कर दिया था। उसके बाद आरोपी ने अभया का शव कुएं में फेंक दिया था। अक्टूबर 2020 में, उच्च न्यायालय ने मामले में दिन-प्रतिदिन के आधार पर ट्रायल चलाने का निर्देश दिया था।

बेंगलुरु के फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी में आरोपियों का नार्को-एनालिसिस और ब्रेन मैपिंग टेस्ट किया गया था। पिछले साल, केरल के उच्च न्यायालय ने फैसला सुनाया था कि आरोपियों के नार्को-एनालिसिस और ब्रेन मैपिंग के परिणामों को सबूतों के रूप में इस्तेमाल नहीं किया जा सकता है।

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