रिट याचिका की बहाली से क्या अंतरिम आदेश पुनर्जीवित हो जाएगा?, सुप्रीम कोर्ट करेगा पड़ताल [आर्डर पढ़े]

Update: 2019-01-08 12:53 GMT

सुप्रीम कोर्ट इस बात की पड़ताल करेगा कि अगर मुख्य रिट याचिका की बहाली की जाती है तो क्या इसके तहत दिए गए अंतरिम आदेश भी पुनर्जीवित हो जाएँगे।

उत्तर प्रदेश राज्य बिजली बोर्ड ने 1995 में एक रिट याचिका दायर की थी जिसे इलाहाबाद हाईकोर्ट ने ख़ारिज कर दिया था। बाद में बोर्ड के आवेदन पर इसे फ़ाइल में दुबारा बहाल किया गया। हालाँकि, इससे पहलेश्रम अदालत के आदेश का पालन करने के लिए आदेश को स्थगित कर दिया गया था, पर हाईकोर्ट ने इसे मानने से इंकार कर दिया कि यह अंतरिम आदेश भी रिट याचिका की बहाली के साथ बहाल हो गया है। इसकेबाद उसने बोर्ड से कहा कि वह पहले तो श्रम अदालत के आदेश का पालन करे और यह बताए कि अब तक इस आदेश का पालन क्यों नहीं किया गया।

हाईकोर्ट के इस आदेश को चुनौती देते हुए बोर्ड ने सुप्रीम कोर्ट के समक्ष एक विशेष अनुमति याचिका दायर की और कहा कि जब मुख्य रिट याचिका की बहाली की जाती है, तो अंतरिम आदेश भी पुनर्जीवित हो जाताहै। इस बारे में वरीद जेकब बनाम सोसम्मा गीवर्ग़ीस मामले में आए निर्णयों का ज़िक्र किया गया।

न्यायमूर्ति आर बनुमती और इंदिरा बनर्जी की पीठ बोर्ड की दलील सुनने के बाद इस मामले में नोटिस जारी किया। पीठ ने हाईकोर्ट द्वारा जारी आदेश को भी स्थगित कर दिया।

वरीद जेकब के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने 2:1 से केरल हाईकोर्ट के फ़ैसले को सही बताया था जिसमें कहा था कि अगर किसी मामले को बहाल किया जाता है तो इस मामले के तहत दिए गए आदेश भी पुनर्जीवित होजाते हैं। न्यायमूर्ति एसबी सिन्हा ने इस फ़ैसले के ख़िलाफ़ अपना फ़ैसला दिया था। 


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