UPSC Civil Service Exam : सुप्रीम कोर्ट ने आखिरी मौका COVID के कारण गंवाने उम्मीदवारों के लिए अतिरिक्त मौका मांगने वाली याचिका खारिज की
सुप्रीम कोर्ट ने सिविल सेवा परीक्षा, 2026 के संबंध में उम्र और प्रयासों में छूट पर पुनर्विचार की मांग वाली याचिका खारिज की। यह याचिका उन उम्मीदवारों के लिए थी जिनका आखिरी मान्य प्रयास COVID-19 महामारी (2020-2021) के कारण प्रभावित हुआ था।
याचिकाकर्ता एक सिविल सेवा उम्मीदवार और COVID-19 योद्धा है। उसने कथित तौर पर 2021 में सिविल सेवा परीक्षा में बैठने के लिए छुट्टी नहीं मिलने की बात कही थी। इसलिए उसने एक बार के लिए अतिरिक्त प्रयास की मांग की। साथ ही यह भी बताया कि प्रतिवादी-अधिकारी, न्यायिक निर्देश और कई बार अनुरोध किए जाने के बावजूद, उम्र और प्रयासों में छूट पर पुनर्विचार के लिए परामर्श प्रक्रिया आयोजित करने में विफल रहे। हालांकि, कोर्ट ने याचिका पर विचार करने से यह देखते हुए इनकार किया कि वह लगभग 5 साल के अंतराल के बाद काफी देर से कोर्ट आया था।
जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की खंडपीठ ने इस मामले की सुनवाई की।
संक्षेप में मामला
यह याचिका जयमिन पटेल नामक सिविल सेवा उम्मीदवार ने दायर की थी। इसमें एक अंतर-मंत्रालयी समिति के गठन की मांग की गई, जिसमें संबंधित कैडर नियंत्रण प्राधिकरण शामिल हों। इस समिति का काम भारत के संविधान के अनुच्छेद 77(3), भारत सरकार (कार्य आबंटन) नियम, 1961, भारत सरकार (कार्य संचालन) नियम, 1961, और केंद्रीय सचिवालय कार्यालय प्रक्रिया नियमावली के तहत अनिवार्य परामर्श ढांचे के अनुसार, ऊपर बताए गए मुद्दों की जांच करना था।
याचिकाकर्ता ने प्रार्थना की थी कि पुनर्विचार की प्रक्रिया सभी संबंधित कैडर नियंत्रण प्राधिकरणों, संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) और संबंधित मंत्रालयों/विभागों के परामर्श से की जाए। उसके बाद रिपोर्ट को सार्वजनिक डोमेन में रखा जाए।
इसके अलावा, याचिकाकर्ता ने प्रस्तावित समिति को यह निर्देश देने की मांग की कि वह UPSC CSE 2026 (जो 24.05.2026 को निर्धारित है) के लिए एक बार के अतिरिक्त प्रयास की अनुमति देने की व्यवहार्यता पर विचार करे। इसके साथ ही उन उम्मीदवारों को उम्र में भी संबंधित छूट दी जाए, जिनके लिए वर्ष 2020 और 2021 में आयोजित सिविल सेवा परीक्षाएं, उम्र और प्रयासों—दोनों ही दृष्टि से—अंतिम मान्य प्रयास थीं। जब तक प्रस्तावित समिति की रिपोर्ट पर विचार नहीं हो जाता, याचिकाकर्ता ने प्रार्थना की कि CSE 2026 के विज्ञापन को जारी करने और उसके संचालन पर रोक लगा दी जाए (जहाँ तक इसका संबंध आयु सीमा और प्रयासों की अनुमत संख्या से जुड़ी पात्रता शर्तों से है)।
याचिका में यह तर्क दिया गया कि COVID-19 काल के दौरान प्रभावित उम्मीदवारों द्वारा दिए गए अभ्यावेदनों की पुनः जांच करने के न्यायिक निर्देश [संदर्भ: अरिजीत शुक्ला बनाम भारत संघ, WP(C) 92/2022], संसदीय सिफारिशों, और प्रभावित उम्मीदवारों के वर्गों की पहचान करने वाले अनुभवजन्य डेटा की उपलब्धता के बावजूद, प्रतिवादी अनुच्छेद 77(3) के तहत निर्धारित अनिवार्य परामर्श प्रक्रिया शुरू करने या कोई उचित निर्णय लेने में विफल रहा।
Case Title: JAIMIN PATEL Versus DEPARTMENT OF PERSONNEL AND TRAINING (DOPT) AND ORS., W.P.(C) No. 281/2026