सुप्रीम कोर्ट से TV Today Network को राहत, रमेश बिधूड़ी और उनके भतीजे के मानहानि मामले में सुनवाई पर रोक
सुप्रीम कोर्ट ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेता रमेश बिधूड़ी और उनके भतीजे राजपाल पोसवाल की ओर से दायर आपराधिक मानहानि के मामलों में TV Today Network Ltd के खिलाफ चल रहे मुकदमे की कार्यवाही पर रोक लगाई।
टीवी टुडे नेटवर्क आज तक और इंडिया टुडे समूह का संचालन करता है। यह मामला वर्ष 2011 में प्रसारित एक खबर से जुड़ा है, जिसमें बिधूड़ी के भतीजे के रिश्तेदार को सामूहिक दुष्कर्म और अपहरण के मामले से जोड़ते हुए खबर दिखाई गई थी।
जस्टिस बीवी नागरत्ना और जस्टिस आर. महादेवन की खंडपीठ ने मामले में अंतरिम राहत देते हुए मुकदमे की कार्यवाही पर रोक लगाई। खंडपीठ ने रमेश बिधूड़ी और राजपाल पोसवाल को विशेष अनुमति याचिका पर अपना जवाबी हलफनामा दिसंबर 2026 तक दाखिल करने की अनुमति दी। अदालत ने यह भी ध्यान में रखा कि निचली अदालत में मामले की अगली सुनवाई 16 अक्टूबर 2026 को निर्धारित है।
टीवी टुडे नेटवर्क ने दिल्ली हाईकोर्ट के नवंबर 2025 के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी। हाईकोर्ट ने कंपनी को आपराधिक मानहानि के मामले से आरोपमुक्त करने की मांग वाली याचिकाएं खारिज की थीं। कंपनी की ओर से दलील दी गई है कि किसी कंपनी को मानहानि के मामले में आरोपी नहीं बनाया जा सकता।
पूरा मामला
यह विवाद वर्ष 2011 में प्रसारित एक खबर से जुड़ा है। उस समय रमेश बिधूड़ी दिल्ली की तुगलकाबाद विधानसभा सीट से विधायक थे। खबर में सामूहिक दुष्कर्म और अपहरण के एक मामले में पुलिस की कथित निष्क्रियता पर सवाल उठाए गए। प्रसारण में मामले से जुड़े एक व्यक्ति को बिधूड़ी के भतीजे का रिश्तेदार बताया गया। खबर के अनुसार, उस मामले में सह-आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका था, जबकि संबंधित व्यक्ति की गिरफ्तारी नहीं हुई।
रमेश बिधूड़ी और राजपाल पोसवाल ने इस प्रसारण को लेकर शिकायतें दर्ज कराईं। उनका आरोप था कि खबर दुर्भावनापूर्ण, भ्रामक और मानहानिकारक थी तथा इसका उद्देश्य जनता के बीच उनकी प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाना था।
नवंबर 2025 में दिल्ली हाईकोर्ट ने टीवी टुडे नेटवर्क की उन याचिकाओं को खारिज किया, जिनमें निचली अदालत के आरोपमुक्त करने से इनकार करने के आदेश को चुनौती दी गई।
हाईकोर्ट ने कहा कि समन से विचारण योग्य मामलों में महानगर दंडाधिकारी को आरोपी को आरोपमुक्त करने का अधिकार नहीं है। अदालत ने यह भी रेखांकित किया था कि टीवी टुडे नेटवर्क ने 20 सितंबर 2014 को जारी समन आदेश को चुनौती नहीं दी थी। ऐसे में कंपनी को आरोपमुक्त करने की मांग स्वीकार नहीं की जा सकती।
हाईकोर्ट ने दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC) की धारा 251 के तहत कार्यवाही समाप्त करने की दलील भी खारिज की थी। अदालत के अनुसार, इस प्रावधान के तहत दंडाधिकारी मामले के गुण-दोष का आकलन करने के लिए लघु सुनवाई नहीं कर सकता और न ही इस चरण पर बचाव पक्ष की दलीलों की विस्तृत जांच कर सकता है। इन पहलुओं पर विचार साक्ष्य पेश किए जाने के बाद ही किया जा सकता है।
अब सुप्रीम कोर्ट के अंतरिम आदेश के बाद मामले की सुनवाई पर फिलहाल रोक रहेगी। टीवी टुडे नेटवर्क की याचिका पर आगे की सुनवाई में यह सवाल अहम होगा कि कंपनी को आपराधिक मानहानि के मामले में आरोपी बनाए जाने और उसे आरोपमुक्त करने के संबंध में कानून की क्या स्थिति है।