UAPA मामलों में 94% से 99% तक बरी होने की संभावना : सुप्रीम कोर्ट

Update: 2026-05-18 07:48 GMT

सुप्रीम कोर्ट ने UAPA के तहत दर्ज नार्को-टेरर मामले में 5 साल से अधिक समय से जेल में बंद जम्मू-कश्मीर निवासी सैयद इफ्तिखार अंद्राबी को जमानत देते हुए कहा कि देश में UAPA मामलों में दोषसिद्धि दर बेहद कम है।

कोर्ट ने कहा कि NCRB के आंकड़ों के अनुसार 2019 से 2023 के बीच देशभर में UAPA मामलों में सजा की दर केवल 1.5% से 4% रही, जबकि जम्मू-कश्मीर में यह 1% से भी कम थी।

जस्टिस बीवी नागरत्ना और जस्टिस उज्जल भुइयां की खंडपीठ ने कहा कि इन आंकड़ों से साफ है कि ऐसे मामलों में 94% से 99% तक बरी होने की संभावना रहती है। कोर्ट ने कहा कि केवल आरोपों के आधार पर किसी व्यक्ति को लंबे समय तक जेल में नहीं रखा जा सकता और “बेल नियम है, जेल अपवाद” का सिद्धांत UAPA मामलों में भी लागू होता है।

पीठ ने 2021 के 'KA Najeeb' फैसले का हवाला देते हुए कहा कि UAPA की धारा 43D(5) को जमानत से इनकार करने का एकमात्र आधार नहीं बनाया जा सकता। कोर्ट ने उमर खालिद और शरजील इमाम को बेल देने से इनकार करने वाले 'गुलफिशा फातिमा' फैसले पर भी गंभीर आपत्ति जताई।

सुप्रीम कोर्ट ने अंद्राबी को सशर्त जमानत देते हुए पासपोर्ट जमा करने और हर पंद्रह दिन में पुलिस स्टेशन में हाजिरी लगाने का निर्देश दिया।

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