सुप्रीम कोर्ट ने और अदालतों की ज़रूरत का पता लगाने के लिए देश भर में कमर्शियल मुकदमों से जुड़ा अपडेटेड डेटा मांगा
कमर्शियल कोर्ट्स एक्ट, 2015 को लागू करने से जुड़े एक मामले में सुप्रीम कोर्ट ने आज देश भर में कमर्शियल मुकदमों के दायर होने के ट्रेंड पर अपडेटेड डेटा मांगा, ताकि यह पता लगाया जा सके कि क्या और कमर्शियल कोर्ट्स की ज़रूरत है।
चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्य कांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की बेंच ने इस मामले की सुनवाई की।
कोर्ट 'इंडियन कमर्शियल एंड आर्बिट्रेशन बार एसोसिएशन' (ICABA) की एक याचिका पर सुनवाई कर रहा था, जिसमें कमर्शियल कोर्ट्स एक्ट, 2015 को तय समय-सीमा में लागू करने के निर्देश देने की मांग की गई। याचिका के ज़रिए, ICABA ने कमर्शियल विवादों को सुलझाने के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी और कमर्शियल कोर्ट्स व कमर्शियल अपीलेट बेंचों की अपर्याप्तता की ओर ध्यान दिलाया।
बता दें, जब 2023 में यह मामला उठाया गया था तो कोर्ट ने भारत सरकार से अलग-अलग राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में कमर्शियल कोर्ट्स के गठन की स्थिति के बारे में जानकारी मांगी थी। फरवरी 2025 में कोर्ट ने देश भर के हाई कोर्ट्स से कमर्शियल विवादों के लंबित होने और उनसे निपटने के लिए उपलब्ध इंफ्रास्ट्रक्चर के बारे में डेटा मांगा।
अप्रैल 2025 में कोर्ट ने कमर्शियल कोर्ट्स के पीठासीन अधिकारियों (Presiding Officers) की पोस्टिंग से पहले उन्हें अनिवार्य ट्रेनिंग देने की ज़रूरत पर ज़ोर दिया।
कोर्ट ने कहा,
"...हम उम्मीद करते हैं कि कमर्शियल कोर्ट्स के पीठासीन अधिकारियों को कुछ ट्रेनिंग, ओरिएंटेशन या रिफ्रेशर कोर्स दिया जाना चाहिए ताकि उन्हें किसी खास [राज्य या क्षेत्र] में लंबित कमर्शियल विवादों की प्रकृति और उचित समय के भीतर इन विवादों के निपटारे के महत्व के बारे में जानकारी दी जा सके, क्योंकि ऐसे विवादों के लंबे समय तक लंबित रहने का देश की अर्थव्यवस्था पर भी बुरा असर पड़ता है।"
उस समय जस्टिस कांत (जो अब CJI हैं) ने यह भी संकेत दिया था कि ज़रूरी जानकारी मिलने के बाद कोर्ट अतिरिक्त इंफ्रास्ट्रक्चर की ज़रूरत पर चरणबद्ध तरीके से विचार करेगा। कोर्ट ने कहा कि कमर्शियल विवादों के लंबे समय तक लंबित रहने का देश की अर्थव्यवस्था पर बुरा असर पड़ता है।
Case: Indian Commercial and Arbitration Bar Association (ICABA) v. Union of India, W.P.(C) No.900/2020