सुप्रीम कोर्ट ने यौन उत्पीड़न से निपटने के लिए कोर्ट/ट्रिब्यूनल और बार निकायों में कमेटियों के गठन पर मांगी रिपोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को अलग-अलग हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल से स्टेटस रिपोर्ट मांगी कि क्या महिलाओं और ट्रांसजेंडर लोगों के खिलाफ यौन उत्पीड़न की शिकायतों से निपटने के लिए हाई कोर्ट, डिस्ट्रिक्ट कोर्ट और बार एसोसिएशन में जेंडर सेंसिटाइजेशन कमेटियां और इंटरनल कंप्लेंट कमेटियां (ICC) बनाई गई।
चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया सूर्यकांत (CJI) और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की बेंच देश भर के हाईकोर्ट और डिस्ट्रिक्ट कोर्ट में इंटरनल कंप्लेंट कमेटियां बनाने सहित विशाखा गाइडलाइंस को प्रभावी ढंग से लागू करने के निर्देश मांगने वाली एक रिट याचिका पर सुनवाई कर रही थी।
याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश सीनियर एडवोकेट सोनिया माथुर ने कोर्ट के सामने एक चार्ट पेश किया, जिसमें नियमों के पालन में बड़ी कमियां बताई गईं। उन्होंने बताया कि सात हाईकोर्ट ने न तो गाइडलाइंस बनाईं और न ही इंटरनल कंप्लेंट कमेटियां बनाईं। यह भी बताया गया कि पटना में कोई मैकेनिज्म लागू नहीं किया गया, जबकि झारखंड में ICC सिर्फ हाईकोर्ट लेवल पर मौजूद है। डिस्ट्रिक्ट कोर्ट इसके दायरे से बाहर हैं। पंजाब, हरियाणा और दिल्ली के डिस्ट्रिक्ट कोर्ट में भी इसी तरह की कमियां बताई गईं।
दलीलों पर ध्यान देते हुए और इस मुद्दे की जांच करने पर सहमत होते हुए कोर्ट ने नोटिस जारी किया और संबंधित रजिस्ट्रार जनरल को अपनी-अपनी स्टेटस रिपोर्ट रिकॉर्ड पर रखने का निर्देश दिया।
आदेश में कहा गया:
"नोटिस जारी किया जाए, पहचाने गए हाई कोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल अपनी-अपनी स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करेंगे कि क्या सभी हाईकोर्ट/डिस्ट्रिक्ट कोर्ट, ट्रिब्यूनल कोर्ट और अन्य संबंधित कोर्ट, साथ ही सभी लेवल के बार एसोसिएशन में जेंडर सेंसिटाइजेशन और महिलाओं और ट्रांसजेंडर लोगों के यौन उत्पीड़न के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए कमेटियां बनाई गईं।"
Case Details : GEETA RANI vs. UNION OF INDIA| W.P.(C) No. 001245 / 2025