'फिजूल याचिका' पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, संसद से सावरकर का चित्र हटाने की मांग ठुकराई

Update: 2026-01-13 10:40 GMT

सुप्रीम कोर्ट ने आज संसद और अन्य सार्वजनिक संस्थानों से वी.डी. सावरकर के चित्र हटाने की मांग वाली याचिका पर कड़ी नाराज़गी जताई और इसे “फिजूल (frivolous)” करार दिया।

चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस विपुल पंचोली की खंडपीठ इस जनहित याचिका (PIL) पर सुनवाई कर रही थी।

यह याचिका एक सेवानिवृत्त आईआरएस अधिकारी बालासुंदरम बालामुरुगन द्वारा दायर की गई थी, जो स्वयं याचिकाकर्ता के रूप में अदालत में उपस्थित हुए।

याचिका पर कड़ा रुख अपनाते हुए चीफ जस्टिस ने कहा—

“आप इस तरह की फिजूल याचिकाएं दाखिल कर रहे हैं, इससे आपकी सोच झलकती है… हम आप पर भारी लागत (कॉस्ट) लगाएंगे। आप अपने आप को क्या समझते हैं?”

याचिकाकर्ता ने दलील दी कि उसने यह याचिका 'जनहित' में दाखिल की है।

इस पर सीजेआई ने चेतावनी देते हुए कहा—

“₹1 लाख का जुर्माना लगाया जाएगा… तब आपको समझ आएगा कि जनहित क्या होता है। आप अदालत का समय बर्बाद कर रहे हैं।”

खंडपीठ ने याचिकाकर्ता से पूछा कि क्या वह याचिका वापस लेना चाहते हैं या जुर्माना भुगतना। इस पर याचिकाकर्ता ने याचिका वापस लेने की सहमति दे दी।

याचिका वापस लेने की अनुमति देते हुए सीजेआई ने कहा—

“अब अपनी सेवानिवृत्ति का आनंद लीजिए और समाज में कोई रचनात्मक भूमिका निभाइए।”

Tags:    

Similar News