सुप्रीम कोर्ट ने प्राइवेट हॉस्पिटल को एसिड अटैक सर्वाइवर को डिस्चार्ज करने से रोका, बिना खर्च की परवाह किए इलाज जारी रखने का निर्देश दिया
सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली के सर गंगा राम हॉस्पिटल को निर्देश दिया कि वह एसिड अटैक सर्वाइवर को, जिसकी दोनों आँखों को नुकसान पहुंचा है और जो वहाँ भर्ती है, बिना खर्च की परवाह किए सभी ज़रूरी इलाज मुहैया कराए।
चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्य कांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की बेंच ने यह आदेश तब दिया जब शाम करीब 4 बजे सर्वाइवर की ओर से खुद पेश हुई एक महिला ने यह मामला उठाया।
महिला ने कोर्ट को बताया कि एसिड अटैक सर्वाइवर अभी गंगा राम हॉस्पिटल में है, लेकिन उसे डिस्चार्ज करने की धमकी दी जा रही है। उसने आरोप लगाया कि हॉस्पिटल का कहना है कि उसके पास ज़रूरी इलाज के लिए "स्पेशलाइज़्ड" सुविधाएँ नहीं हैं।
महिला ने यह भी दावा किया कि अपोलो हॉस्पिटल से भी सलाह ली गई, लेकिन उसने सर्वाइवर को भर्ती करने से मना कर दिया। साथ ही यह भी बताया गया कि सर्वाइवर सरकारी हॉस्पिटल नहीं जाना चाहती। महिला ने इस बात पर ज़ोर दिया कि सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेशों के ज़रिए एसिड अटैक सर्वाइवर्स को अपनी पसंद के किसी भी प्राइवेट हॉस्पिटल में इलाज कराने का अधिकार दिया।
CJI ने कहा,
"अगर वह गंगा राम में है, तो उसे वहीं रहने दें।"
महिला ने इस बात पर सहमति जताई, लेकिन साथ ही यह भी कहा कि अगर सर्वाइवर को गंगा राम हॉस्पिटल से कहीं और शिफ्ट करना ही पड़े तो उसे अपोलो हॉस्पिटल में इलाज की इजाज़त मिलनी चाहिए।
आखिरकार, कोर्ट ने सर गंगा राम हॉस्पिटल के मैनेजमेंट को निर्देश दिया कि वे सर्वाइवर को इनडोर पेशेंट के तौर पर भर्ती करें और इलाज पर होने वाले खर्च की परवाह किए बिना, ज़रूरत पड़ने पर दवाइयों और प्लास्टिक सर्जरी समेत सभी सुविधाएं मुहैया कराएं। हॉस्पिटल द्वारा सर्वाइवर को जाने के लिए मजबूर करने के आरोपों पर कोर्ट ने कहा कि हॉस्पिटल उसे तब तक डिस्चार्ज नहीं करेगा जब तक डॉक्टर यह सर्टिफ़ाई न कर दें कि वह डिस्चार्ज के लिए फिट है और उसे केवल आउटडोर इलाज की ज़रूरत होगी।
आदेश में यह भी कहा गया कि हॉस्पिटल इलाज के बिल सुप्रीम कोर्ट को भेज सकता है ताकि खर्च की भरपाई के बारे में निर्देश जारी किए जा सकें।
रजिस्ट्री को निर्देश दिया गया कि वह खुद पेश हुई महिला द्वारा दी गई जानकारी को एसिड अटैक सर्वाइवर्स से जुड़े कोर्ट में लंबित मामले में एक एप्लीकेशन के तौर पर दर्ज करे।