BREAKING | सुप्रीम कोर्ट ने खारिज की रेबीज़ वाले कुत्तों की 'इच्छामृत्यु' के खिलाफ NGO की याचिका

Update: 2026-05-25 06:41 GMT

सुप्रीम कोर्ट ने NGO द्वारा दायर उस याचिका को सुनने से इनकार किया, जिसमें यह स्पष्टीकरण मांगा गया था कि कोर्ट का हालिया निर्देश, जिसमें कुछ खास परिस्थितियों में कुत्तों को मारने की अनुमति दी गई, उसे आवारा कुत्तों को अंधाधुंध मारने का आदेश नहीं माना जाना चाहिए।

यह याचिका NGO 'एनिमल्स आर पीपल टू' ने सुप्रीम कोर्ट में चल रही सुनवाई के दौरान दायर की है। NGO ने चिंता जताई है कि कोर्ट के निर्देश की अधिकारी गलत व्याख्या कर रहे हैं, ताकि कुत्तों को गैर-कानूनी तरीके से मारने या हटाने को सही ठहराया जा सके।

जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने वकील से कहा कि वे इस मामले में पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट में याचिका दायर करें।

वकील अनिल कुमार मिश्रा ने इस मामले का ज़िक्र किया, लेकिन कोर्ट ने कहा कि चूंकि उसने संबंधित हाई कोर्ट्स को इस मामले की निगरानी जारी रखने की अनुमति दे रखी है। इसलिए वह इस याचिका पर सुनवाई नहीं करेगा। कुमार ने पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान के उस सार्वजनिक बयान का ज़िक्र किया, जिसमें उन्होंने "आवारा कुत्तों को खत्म करने" की बात कही थी। साथ ही खालसा कॉलेज से कुत्तों को हटाने से जुड़ी मीडिया रिपोर्ट्स का भी हवाला दिया था।

उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश को गलत समझा जा रहा है और उसे कानून के विपरीत तरीके से लागू किया जा रहा है।

जस्टिस नाथ ने कहा कि कोर्ट से यह उम्मीद नहीं की जा सकती कि वह सिर्फ इसलिए अपना आदेश बदल दे, क्योंकि किसी मुख्यमंत्री ने कोई सार्वजनिक बयान दिया।

कुमार ने कहा:

"पंजाब के मुख्यमंत्री ने ट्वीट किया कि सुप्रीम कोर्ट ने सभी कुत्तों को मारने की पूरी छूट दे दी है।"

जस्टिस नाथ ने जवाब दिया:

"अगर मुख्यमंत्री कोई बयान देते हैं तो क्या इसका मतलब यह है कि हमें अपना आदेश बदलने की ज़रूरत है?"

कुमार ने याचिका वापस लेने और इसे हाईकोर्ट के सामने रखने की अनुमति मांगी। हालांकि, कोर्ट ने कहा कि वह इस याचिका पर सुनवाई नहीं कर रहा है और याचिकाकर्ता बेझिझक हाईकोर्ट जा सकता है।

Tags:    

Similar News