संगठित अपराध और जबरन वसूली का मामला: पूर्व RJD MLA रितुलाल यादव की ज़मानत याचिका खारिज
सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में (3 सितंबर) संगठित अपराध और जबरन वसूली के आरोपों के मामले में राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के पूर्व विधायक रितलाल यादव की ज़मानत याचिका खारिज करने वाले पटना हाईकोर्ट के आदेश में दखल देने से इनकार किया। हालांकि, कोर्ट ने कहा कि अगर एक साल के भीतर उनके मुकदमे में कोई खास प्रगति नहीं होती है तो वह पटना हाईकोर्ट के सामने ज़मानत के लिए फिर से अर्ज़ी दे सकते हैं, बशर्ते वह मुकदमे में सहयोग करें।
जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस शील नागू की बेंच ने यादव की ओर से सीनियर एडवोकेट कपिल सिबल की दलीलें सुनीं। हालांकि, बेंच ने अभी उन्हें ज़मानत देने से इनकार कर दिया। कोर्ट ने निर्देश दिया कि ट्रायल कोर्ट जल्द से जल्द आरोप तय करे।
बेंच ने कहा,
"हम इस चरण में हाईकोर्ट के फैसले और आदेश में दखल देने के इच्छुक नहीं हैं। इसलिए स्पेशल लीव पिटिशन खारिज की जाती है। हम ट्रायल कोर्ट को जल्द आरोप तय करने के लिए कहते हैं। हालांकि, अगर आरोप तय होने की तारीख से अगले एक साल के भीतर मुकदमे में कोई खास प्रगति नहीं होती है - और याचिकाकर्ता ने मुकदमे में तेज़ी लाने के लिए पूरा सहयोग किया हो - तो वह हाईकोर्ट के सामने ज़मानत के लिए फिर से अर्ज़ी दे सकते हैं।"
बता दें, 26 फरवरी को पटना हाईकोर्ट ने भारतीय न्याय संहिता, 2023 (BNS) की धारा 111(4), 111(6) और 111(7) के तहत दर्ज संगठित अपराध के मामले में उन्हें ज़मानत देने से इनकार किया।
यादव के खिलाफ मामला यह है कि वह और अन्य लोग एक संगठित गिरोह का हिस्सा हैं और उन्होंने रियल एस्टेट बिल्डरों और व्यापारियों को गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी देकर उनसे फिरौती मांगी और अपनी ज्ञात आय के स्रोतों से कहीं ज़्यादा संपत्ति जमा की। दोनों पक्षों की दलीलों पर विचार करने के बाद पटना हाईकोर्ट ने उनकी ज़मानत याचिका खारिज की थी।
Case Details: RITLAL YADAV @ RITLAL RAI vs. THE STATE OF BIHAR|Diary No. - 22331/2026