'एक वर्ग को क्यों बदनाम करें?': 'घूसखोर पंडित' नाम पर सुप्रीम कोर्ट की आपत्ति, निर्माताओं से नया टाइटल लगाने को कहा

Update: 2026-02-12 10:52 GMT

सुप्रीम कोर्ट ने आज नेटफ्लिक्स सीरीज़ 'घूसखोर पंडित' के निर्माताओं को निर्देश दिया कि वे एक शपथपत्र दाखिल कर यह स्पष्ट करें कि विवादित शीर्षक वापस ले लिया गया है और नया शीर्षक क्या होगा। अदालत ने कहा कि जब तक नया नाम रिकॉर्ड पर प्रस्तुत नहीं किया जाता, तब तक सीरीज़ की रिलीज़ की अनुमति नहीं दी जाएगी।

जस्टिस बी.वी. नागरत्ना और जस्टिस उज्जल भुइयां की खंडपीठ ने इस मामले में दायर जनहित याचिका (PIL) पर सुनवाई करते हुए केंद्र सरकार, केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (CBFC) और निर्देशक नीरज पांडे को नोटिस जारी किया। यह याचिका अतुल मिश्रा द्वारा दायर की गई थी, जिसमें आरोप लगाया गया कि सीरीज़ का शीर्षक पूरे ब्राह्मण समुदाय को बदनाम करता है।

सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि वह संविधान के अनुच्छेद 19(1)(a) के तहत अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के अधिकार का सम्मान करती है, लेकिन यह अधिकार पूर्ण नहीं है और इस पर युक्तिसंगत प्रतिबंध लागू होते हैं। पीठ ने शीर्षक पर आपत्ति जताते हुए टिप्पणी की, “आप इस तरह के शीर्षक से समाज के एक वर्ग को क्यों अपमानित करना चाहते हैं?”

निर्माताओं की ओर से वकील ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि शीर्षक बदलने की प्रक्रिया पहले ही शुरू कर दी गई है। इस पर अदालत ने निर्देश दिया कि यह बयान शपथपत्र के रूप में दाखिल किया जाए। मामले की अगली सुनवाई 19 फरवरी को निर्धारित की गई है।

यह सीरीज़ अभिनेता मनोज बाजपेयी अभिनीत है और इसका निर्देशन नीरज पांडे ने किया है। इसे नेटफ्लिक्स पर स्ट्रीम किया जाना प्रस्तावित है। शीर्षक और प्रचार अभियान की घोषणा के बाद से ही इसे लेकर विवाद शुरू हो गया था।

इससे पहले, दिल्ली हाईकोर्ट में भी एक रिट याचिका दायर कर शीर्षक और कथित सामग्री का विरोध किया गया था। याचिका में कहा गया था कि यह शीर्षक सामूहिक मानहानि, रूढ़ छवि प्रस्तुत करने और पूरे धार्मिक-सामाजिक समुदाय को बदनाम करने के समान है, जिससे आचार्यों और ब्राह्मण समाज की गरिमा को अपूरणीय क्षति होगी।

दिल्ली हाईकोर्ट ने उस याचिका का निस्तारण करते हुए यह दर्ज किया था कि निर्माता फिल्म का शीर्षक बदलने के लिए सहमत हो गए हैं और नया शीर्षक फिल्म की कथा और उद्देश्य को अधिक सटीक रूप से दर्शाएगा।

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