संजय कपूर–करिश्मा कपूर के तलाक समझौते की प्रमाणित प्रतियों पर सुप्रीम कोर्ट करेगा विचार
सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को दिवंगत उद्योगपति सुनजय कपूर की पत्नी प्रिया कपूर की उस अर्जी पर विचार किया, जिसमें उन्होंने वर्ष 2016 में सुनजय कपूर और करिश्मा कपूर के बीच हुए तलाक से जुड़े समझौते और बच्चों की कस्टडी से संबंधित दस्तावेजों की प्रमाणित प्रतियां मांगी हैं।
प्रिया कपूर का कहना है कि ये दस्तावेज वर्तमान संपत्ति विवाद से जुड़े मामलों में आवश्यक हैं।
यह अर्जी जस्टिस एएस चंदूरकर के समक्ष चैंबर में रखी गई।
प्रिया कपूर की ओर से सीनियर एडवोकेट मनींदर सिंह ने दलील दी कि दिल्ली हाइकोर्ट में चल रहे संपत्ति विवाद में वित्तीय प्रावधान, बच्चों के भरण-पोषण और तलाक के बाद की जिम्मेदारियों से जुड़े मुद्दे बार-बार उठाए जा रहे हैं। ऐसे में तलाक समझौते और कस्टडी की शर्तों की प्रमाणित प्रतियां अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।
इस अर्जी का करिश्मा कपूर की ओर से विरोध किया गया।
वर्तमान में दिल्ली हाइकोर्ट में करिश्मा कपूर के बच्चों समायरा कपूर और कियान राज कपूर द्वारा एक दीवानी वाद दाखिल किया गया। यह वाद उनके पिता की दूसरी पत्नी प्रिया कपूर, उनके पुत्र, दिवंगत की मां रानी कपूर और 21 मार्च 2025 की कथित वसीयत की निष्पादक श्रद्धा सूरी मारवाह के खिलाफ दायर किया गया। सुनजय कपूर का निधन 12 जून, 2025 को हुआ था।
इस वाद में करिश्मा कपूर के बच्चों ने अपने दिवंगत पिता की व्यक्तिगत संपत्तियों में हिस्सा मांगा।
याचिका में कहा गया कि माता-पिता के तलाक के बाद भी सुनजय कपूर ने अपने बच्चों को पूरा स्नेह और सहयोग दिया और उनकी जिम्मेदारियों का निर्वहन किया।
वाद में यह भी कहा गया कि सुनजय कपूर के निधन के बाद उनकी दूसरी पत्नी प्रिया कपूर ने स्वयं करिश्मा कपूर और उनके बच्चों को यह जानकारी दी थी कि कोई वसीयत मौजूद नहीं है और आरके फैमिली ट्रस्ट में ही सभी संपत्तियां सम्मिलित हैं।
सुप्रीम कोर्ट अब इस बात पर विचार करेगा कि क्या प्रिया कपूर को तलाक समझौते और कस्टडी से जुड़े दस्तावेजों की प्रमाणित प्रतियां उपलब्ध कराई जानी चाहिए।