रेलवे सुरक्षा पर सुप्रीम कोर्ट की सख़्त टिप्पणी, बजट आवंटन को बताया नाकाफ़ी
सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में रेलवे सुरक्षा को लेकर केंद्र सरकार और रेल मंत्रालय पर गंभीर सवाल उठाए । कोर्ट ने कहा कि रेलवे के लिए किए जा रहे बजटीय आवंटन आम आदमी की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए पर्याप्त नहीं हैं और इस दिशा में प्राथमिकता के आधार पर ठोस कदम उठाए जाने चाहिए।
जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और जस्टिस आर. महादेवन की पीठ ने स्पष्ट शब्दों में कहा,
“आम आदमी की सुरक्षा और संरक्षा से अधिक महत्वपूर्ण कुछ नहीं है, जो यात्री रेलवे पर भरोसा करके यात्रा करता है, उसकी जान की हिफ़ाज़त सर्वोपरि है। रेलवे कोई ऐसी संस्था नहीं है, जहां निवेश कहीं और किया जाए।”
कोर्ट इस मामले में रेलवे सुरक्षा से जुड़े दो प्रमुख मुद्दों पर विचार कर रही है-
पहला, बिना फाटक वाले रेलवे क्रॉसिंग और रेलवे ओवरब्रिज/अंडरब्रिज का निर्माण और दूसरा, कवच नामक स्वचालित सुरक्षा प्रणाली जो मानवीय भूल से होने वाली रेल दुर्घटनाओं को रोकने के लिए पटरियों पर लगाई जाती है।
यह मुद्दा एक रेलवे दुर्घटना मुआवज़ा मामले के दौरान सामने आया, जिसमें सीनियर एडवोकेट शिखिल सूरी (एमिक्स क्यूरी) ने सुरक्षा संबंधी चिंताएं उजागर की थीं। इसके बाद कोर्ट ने यह भी संज्ञान लिया कि रेलवे की बीमा सुविधा फिलहाल केवल ऑनलाइन टिकट खरीदने वाले यात्रियों तक सीमित है और काउंटर से टिकट लेने वालों को इसका लाभ नहीं मिल पा रहा।
ताज़ा आदेश में सुप्रीम कोर्ट ने रेलवे द्वारा दाख़िल हलफ़नामे पर नाराज़गी जताते हुए कहा कि बजट का बड़ा हिस्सा PSU जॉइंट वेंचर और एसपीवी में निवेश के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है, जो कोर्ट की प्रारंभिक राय में पूरी तरह अस्वीकार्य है।
कोर्ट ने सुनवाई के दौरान रेलवे सुरक्षा के मुख्य आयुक्त से भी बातचीत की। उन्होंने बताया कि यदि लेवल क्रॉसिंग गेट्स को इंटरलॉक कर दिया जाए तो इससे कम लागत में और कम समय में सुरक्षा सुनिश्चित की जा सकती है। साथ ही जब पूरे रेलवे नेटवर्क में कवच प्रणाली लागू होगी तो यह इंटरलॉकिंग सिस्टम उसे और अधिक प्रभावी बना देगा।
मामले की अगली सुनवाई के लिए स्थगन देते हुए पीठ ने एडिशनल सॉलिसिटर जनरल विक्रमजीत बनर्जी को निर्देश दिया कि वे रेलवे से स्पष्ट निर्देश लेकर आएं। कोर्ट ने उम्मीद जताई कि संबंधित प्राधिकारी अधिक व्यावहारिक दृष्टिकोण अपनाएंगे और बजट का बड़ा हिस्सा सीधे रेलवे ढांचे के सुधार में लगाएंगे, जहां सुरक्षा और संरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता मिले।
इससे पहले जनवरी में भी सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि रेलवे को टिकट बुकिंग के तरीके से अलग हटकर सभी यात्रियों को बीमा सुविधा उपलब्ध कराने के लिए संतुलित नीति अपनानी चाहिए, बशर्ते टिकट वैध रूप से खरीदे और इस्तेमाल किए गए हों।
कोर्ट ने केंद्र सरकार से यह भी कहा कि वह पिछले तीन वर्षों में संसद द्वारा रेल मंत्रालय को दिए गए कुल बजट उसके आंतरिक आवंटन और विभिन्न मदों में किए गए वास्तविक खर्च का विस्तृत ब्यौरा हलफ़नामे के रूप में पेश करे। साथ ही सुरक्षा कार्यों की अनुमानित पूर्णता अवधि 2042-43 तक बताए जाने और बजटीय प्रावधानों के बीच दिखाई दे रहे अंतर पर भी स्पष्टीकरण मांगा गया।