AoR परीक्षा रद्द करने के खिलाफ याचिका पर सुनवाई से सुप्रीम कोर्ट का इनकार, वकीलों को CJI से गुहार लगाने की छूट
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को 2026 में एडवोकेट-ऑन-रिकॉर्ड (AoR) परीक्षा आयोजित नहीं करने के फैसले को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई से इनकार किया। हालांकि अदालत ने नाराज वकीलों को चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) के समक्ष प्रशासनिक स्तर पर प्रतिनिधित्व देने की अनुमति दी।
जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस पी बी वराले की खंडपीठ ने कहा कि इस मामले पर न्यायिक पक्ष से विचार नहीं किया जा सकता।
खंडपीठ ने कहा,
“न्याय के हित में यही उचित होगा कि याचिकाकर्ता CJI को विस्तृत प्रतिनिधित्व दें। हमें विश्वास है कि चीफ जस्टिस उस पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करेंगे।”
अदालत ने याचिकाकर्ताओं को 10 दिनों के भीतर प्रतिनिधित्व दाखिल करने का निर्देश दिया।
सुनवाई के दौरान जस्टिस अरविंद कुमार ने कहा,
“हमारे पास बेहद संवेदनशील चीफ जस्टिस हैं हमें भरोसा है कि इस मामले पर विचार किया जाएगा।”
जस्टिस वराले ने भी कहा,
“हम आशावादी हैं।”
याचिकाकर्ताओं की ओर से सीनियर एडवोकेट गोपाल शंकरनारायणन ने दलील दी कि कई उम्मीदवार पिछली AoR परीक्षा में कुछ ही विषयों से असफल हुए हैं और नियमों के अनुसार उन्हें अगली परीक्षा में दोबारा मौका मिलना था। ऐसे में 2026 की परीक्षा रद्द होने से उन्हें गंभीर नुकसान होगा।
सीनियर एडवोकेट शादन फरासत ने कहा कि कुछ उम्मीदवार एक वर्ष से तैयारी कर रहे थे और केवल मामूली अंतर से पिछली परीक्षा में असफल हुए। उन्होंने सुझाव दिया कि अदालत चाहे तो AoR की संख्या नियंत्रित करे लेकिन परीक्षा पूरी तरह रद्द न की जाए।
सीनियर एडवोकेट चंदर उदय सिंह ने भी कहा कि उनके मुवक्किल सिर्फ एक पेपर से पिछली परीक्षा में असफल हुए और नियमों के तहत अगली परीक्षा में बैठने के पात्र थे।
इसके बावजूद सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि वह इस विवाद पर न्यायिक अधिकार क्षेत्र में हस्तक्षेप नहीं करेगा।
गौरतलब है कि 30 अप्रैल को सुप्रीम कोर्ट के परीक्षा बोर्ड ने 2026 में AoR परीक्षा नहीं कराने का फैसला लिया था। यह निर्णय AoR की कुल संख्या को ध्यान में रखते हुए लिया गया।
सुप्रीम कोर्ट की वेबसाइट पर जारी अधिसूचना में कहा गया था,
“AoR की कुल संख्या को देखते हुए वर्ष 2026 में एडवोकेट-ऑन-रिकॉर्ड परीक्षा आयोजित नहीं की जाएगी। वर्ष 2027 में संभावित अगली परीक्षा की तिथियां बाद में अधिसूचित की जाएंगी।”
AoR परीक्षा पास करने वाले वकीलों को ही सुप्रीम कोर्ट में मामलों की फाइलिंग का अधिकार मिलता है।