सुप्रीम कोर्ट ने अवैध प्रवासियों का पता लगाने के बहाने असम में अल्पसंख्यकों के उत्पीड़न को रोकने की मांग वाली याचिका पर नोटिस जारी किया

Update: 2022-04-11 12:47 GMT

सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को कथित विदेशियों का पता लगाने और निर्वासन के नाम पर असम के धार्मिक और भाषाई अल्पसंख्यक समुदायों के लोगों के उत्पीड़न को रोकने की मांग वाली एक रिट याचिका में नोटिस जारी किया।

जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ और जस्टिस सूर्यकांत की पीठ ने असम संमिलिता महासंघ और अन्य बनाम भारत संघ और अन्य 2015 3 एससीसी 1 में किए गए संदर्भ के निपटान के बाद मामले को सूचीबद्ध करने का निर्देश दिया। यह मामला नागरिकता अधिनियम, 1955 की धारा 6ए की संवैधानिकता से संबंधित है। साथ ही यह असम-एनआरसी के लिए वैधानिक आधार प्रदान करता है

पीठ ने अपने आदेश में कहा,

"2015 3 एससीसी 1 असम संमिलिता महासंघ और अन्य बनाम भारत संघ और अन्य में किए गए संदर्भ के मद्देनजर, संदर्भ के निपटारे के बाद याचिका को निपटान के बाद सूचीबद्ध किया जाना चाहिए।"

याचिका "असम सांख्यलाघु संग्राम परिषद" नामक एक संगठन द्वारा दायर की गई।

मामले को जब सुनवाई के लिए लाया गया तो याचिकाकर्ता के वरिष्ठ अधिवक्ता संजय हेगड़े ने प्रस्तुत किया कि असम एनआरसी के राज्य समन्वयक ने राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (एनआरसी) के पुन: सत्यापन की मांग करते हुए एक आवेदन दायर किया है। याचिका में 31 अगस्त, 2019 को असम की एनआरसी की अंतिम सूची से किसी भी व्यक्ति को हटाने या बाहर करने के अधिकार को प्रतिबंधित करने की भी मांग की गई।

पीठ ने कहा,

"हम इस मामले को संविधान पीठ के बाद सूचीबद्ध करने के लिए कह सकते हैं। हम एक नोटिस जारी करेंगे और हम मामले को संविधान पीठ के बाद सूचीबद्ध करेंगे।"

याचिकाकर्ताओं ने संदेह की सामग्री एकत्र करने में अपने प्रारंभिक बोझ का निर्वहन किए बिना किसी की नागरिकता पर संदेह करने से राज्य को सख्ती से प्रतिबंधित करने की भी मांग की।

विदेशी (न्यायाधिकरण) आदेश, 1964 में एक संशोधन के लिए भी प्रार्थना की गई कि एक संदिग्ध व्यक्ति की स्थिति की पहचान और निर्धारण के लिए कार्यप्रणाली/सिस्टम से संबंधित प्रावधान शामिल किया जाए।

याचिका में याचिकाकर्ताओं ने भारत के रजिस्ट्रार जनरल को 31/8/2019 को प्रकाशित एनआरसी की मसौदा सूची को अंतिम रूप देने, अंतिम सूची में शामिल सभी व्यक्तियों को एनआरसी पहचान पत्र जारी करने और अपील करने के लिए सुविधाएं प्रदान करने का निर्देश देने की भी प्रार्थना की। एनआरसी से छूटे हुए लोगों की याचिका एडवोकेट आदिल अहमद ने दायर की।

उल्लेखनीय है कि 17 दिसंबर, 2014 को जस्टिस रंजन गोगोई और जस्टिस आरएफ नरीमन की पीठ ने असम संमिलिता महासंघ द्वारा दायर याचिकाओं पर सुनवाई के बाद नागरिकता अधिनियम, 1955 की धारा 6 ए की संवैधानिक वैधता को चुनौती दिए जाने पर मामले को बड़ी संवैधानिक पीठ को संदर्भित किया था।

19 अप्रैल, 2017 को जस्टिस मदन बी.लोकुर, जस्टिस आर.के.अग्रवाल, जस्टिस प्रफुल्ल चंद्र पंत, जस्टिस डी.वाई.चंद्रचूड़ और जस्टिस अशोक भूषण की पांच जजों की बेंच का गठन किया गया था।

केस शीर्षक: असम सांख्यलाघु संग्राम परिषद बनाम यूओआई और अन्य | डब्ल्यूपी (सी) 201/2022

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