मुस्लिम 'हिबा' को रजिस्ट्रेशन से छूट देने वाली धारा 129 को चुनौती पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा—कानून आयोग से संपर्क करें

Update: 2026-03-12 10:20 GMT

सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को ट्रांसफर ऑफ प्रॉपर्टी एक्ट, 1882 की धारा 129 को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई से इनकार कर दिया। यह धारा मुस्लिम कानून के तहत किए गए 'हिबा' (गिफ्ट) को ट्रांसफर ऑफ प्रॉपर्टी एक्ट के प्रावधानों से छूट देती है।

चीफ़ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस विपुल पंचोली की खंडपीठ ने याचिका का निस्तारण करते हुए याचिकाकर्ता को इस मुद्दे को भारत के विधि आयोग (Law Commission of India) के समक्ष उठाने की स्वतंत्रता दी।

अदालत ने अपने आदेश में कहा कि इस प्रकार के मुद्दे पर विचार करने के लिए विधि आयोग जैसे विशेषज्ञ निकाय के पास जाना अधिक उपयुक्त होगा, इसलिए सुप्रीम कोर्ट इस याचिका पर विचार करने का कोई कारण नहीं देखता।

याचिकाकर्ता का तर्क

याचिकाकर्ता हरी शंकर जैन ने दलील दी थी कि धारा 129 के कारण मुस्लिम कानून के तहत दिए जाने वाले उपहार (हिबा) को पंजीकरण और स्टांप ड्यूटी से छूट मिल जाती है, जिससे सरकारी राजस्व को नुकसान होता है।

उन्होंने यह भी कहा कि यह प्रावधान धर्म के आधार पर भेदभाव पैदा करता है, क्योंकि गैर-मुस्लिमों द्वारा दिए गए उपहारों के लिए पंजीकरण और स्टांप ड्यूटी अनिवार्य है, जबकि मुसलमानों के लिए नहीं।

अदालत की टिप्पणी

चीफ़ जस्टिस सूर्यकांत ने पूछा कि याचिकाकर्ता इस कानून से व्यक्तिगत रूप से कैसे प्रभावित हैं। उन्होंने कहा कि यदि इससे राजस्व का नुकसान होता है तो संसद कानून में संशोधन कर सकती है।

अदालत ने यह भी सवाल किया कि यदि यह मुद्दा इतना महत्वपूर्ण था तो किसी सांसद या संसद के समक्ष इसे पहले क्यों नहीं उठाया गया।

जस्टिस जॉयमाल्य बागची ने कहा कि इस प्रावधान को दाता (donor) और प्राप्तकर्ता (donee) के दृष्टिकोण से भी देखना चाहिए। उन्होंने बताया कि भले ही दाता मुस्लिम हो, लेकिन उपहार प्राप्त करने वाला व्यक्ति गैर-मुस्लिम भी हो सकता है, इसलिए इसे केवल धर्म के आधार पर भेदभाव नहीं कहा जा सकता।

अदालत ने कहा कि संसद ने मौखिक उपहार (oral gift) को पंजीकरण से छूट देने के लिए यह वर्गीकरण किया है, इसलिए इस मुद्दे पर उचित मंच संसद या विधि आयोग ही है।

इसी आधार पर सुप्रीम कोर्ट ने याचिका पर विचार करने से इनकार करते हुए याचिकाकर्ता को विधि आयोग के समक्ष जाने की अनुमति दी।

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