सुप्रीम कोर्ट ने ईंधन बचाने के उपाय शुरू किए: सिर्फ़ VC से सुनवाई, जज करेंगे कार-पूलिंग, स्टाफ़ के लिए WFH
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार के ईंधन बचाने के उपायों के तहत तुरंत कई प्रशासनिक कदम उठाए। इनमें कुछ खास तरह के मामलों के लिए वर्चुअल सुनवाई ज़रूरी करना, जजों का कार-पूलिंग करना, और रजिस्ट्री स्टाफ़ के लिए कुछ हद तक 'वर्क-फ़्रॉम-होम' (WFH) की व्यवस्था करना शामिल है।
15 मई, 2026 को जारी एक सर्कुलर में सुप्रीम कोर्ट के सेक्रेटरी जनरल भरत पराशर ने बताया कि ये कदम कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग द्वारा 12 मई, 2026 को जारी ऑफ़िस मेमोरेंडम के आधार पर लागू किए जा रहे हैं। यह मेमोरेंडम अमेरिका-ईरान संघर्ष के बाद पैदा हुए ईंधन संकट को देखते हुए जारी किया गया।
इन नए उपायों के तहत सोमवार और शुक्रवार जैसे 'मिसलेनियस दिनों' (विविध मामलों की सुनवाई के दिनों) पर लिस्टेड सभी मामले साथ ही कोर्ट के 'आंशिक कार्य दिवसों' के दौरान तय किए गए मामले अब अगले आदेश तक सिर्फ़ वीडियो-कॉन्फ़्रेंसिंग के ज़रिए ही सुने जाएंगे।
सर्कुलर में रजिस्ट्री को निर्देश दिया गया कि वे वीडियो-कॉन्फ़्रेंसिंग के लिंक समय पर भेजें, इंटरनेट कनेक्टिविटी स्थिर रखें और सुनवाई के दौरान जजों को कोई परेशानी न हो, इसके लिए तुरंत तकनीकी सहायता दें।
इसके अलावा, सुप्रीम कोर्ट के जजों ने "सर्वसम्मति से फ़ैसला किया" कि वे आपस में कार-पूलिंग की व्यवस्था को बढ़ावा देंगे।
कोर्ट ने रजिस्ट्री की हर ब्रांच या सेक्शन के 50 प्रतिशत तक स्टाफ़ को हफ़्ते में ज़्यादा-से-ज़्यादा दो दिन 'वर्क-फ़्रॉम-होम' करने की भी इजाज़त दी। हालांकि, सर्कुलर में यह साफ़ किया गया कि काम बिना किसी रुकावट के चलता रहे, इसके लिए ऑफ़िस में पर्याप्त स्टाफ़ का मौजूद रहना ज़रूरी है।
रजिस्ट्रारों से कहा गया कि वे हफ़्ते भर का रोस्टर पहले से ही तैयार कर लें। जो कर्मचारी घर से काम कर रहे हैं, उन्हें फ़ोन पर उपलब्ध रहना होगा और ज़रूरत पड़ने पर किसी भी समय ऑफ़िस आने के लिए तैयार रहना होगा। अधिकारियों को यह भी ज़िम्मेदारी दी गई कि वे उन्हें सौंपा गया सारा काम समय पर पूरा करवाएं।
सर्कुलर में रजिस्ट्री के अधिकारियों को यह छूट भी दी गई कि अगर किसी खास ब्रांच या सेक्शन में काम की प्रकृति ऐसी है कि वहां 'वर्क-फ़्रॉम-होम' की व्यवस्था व्यावहारिक नहीं है तो वे इस व्यवस्था को कम कर सकते हैं या उसमें बदलाव कर सकते हैं।