सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान को पर्यावरण से जुड़े मुद्दों से निपटने के लिए अंतर-विभागीय समूह और नदी प्राधिकरण बनाने का निर्देश दिया

Update: 2026-08-08 13:24 GMT

राजस्थान की नदियों में औद्योगिक प्रदूषण से निपटने के लिए स्वतः संज्ञान (suo motu) लेते हुए शुरू किए गए मामले में सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में 'एकीकृत समन्वय समूह' (Integrated Coordination Group) बनाने का निर्देश दिया। यह समूह 'उच्च-स्तरीय पारिस्थितिकी तंत्र निगरानी समिति' (High Level Ecosystem Oversight Committee) के साथ मिलकर काम करेगा और पारिस्थितिकी से जुड़ी चिंताओं को दूर करने के लिए व्यापक कार्य योजना पेश करेगा।

जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने यह आदेश पारित किया। इसमें पर्यावरण के नुकसान को रोकने, प्रदूषण कम करने, पारिस्थितिकी तंत्र को बहाल करने, नदी के पारिस्थितिकी तंत्र के संरक्षण, भूजल संसाधनों की सुरक्षा, जैव विविधता को बचाने और नदी बेसिन प्रबंधन को नियंत्रित करने वाले संस्थागत ढांचे को मजबूत करने के लिए एक समाधान योजना (Resolution Plan) बनाने को कहा गया।

कोर्ट ने कहा,

"समाधान योजना में उन कार्यों (Action Points), उन्हें लागू करने के लिए जिम्मेदार प्राधिकरण, कार्यान्वयन के ढांचे, मापने योग्य लक्ष्यों (Milestones) और हर हिस्से को पूरा करने के लिए निश्चित समय-सीमा की पहचान की जाएगी।"

निर्देशों के अनुसार, एकीकृत समन्वय समूह की अध्यक्षता राजस्थान के मुख्य सचिव करेंगे। उन्हें समूह में संबंधित राज्य विभागों - जैसे पर्यावरण, वन, राजस्व, जल संसाधन विभाग, राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड आदि - के वरिष्ठ अधिकारियों को शामिल करने की छूट होगी। मुख्य सचिव विभागों के बीच प्रभावी समन्वय सुनिश्चित करेंगे और समय-समय पर समाधान योजना के कार्यान्वयन की समीक्षा भी करेंगे।

समिति और समूह द्वारा जिन मुद्दों पर विचार किया जाना है, उनमें सीधी रुचि रखने वाले लोग (जैसे औद्योगिक इकाइयां) अपनी बात उनके सामने रख सकते हैं। इन पर सतत विकास और पर्यावरण संरक्षण के व्यापक लक्ष्यों को ध्यान में रखते हुए उनके गुण-दोष के आधार पर निर्णय लिया जाएगा। हालांकि, समूह के लिए ऐसे हितधारकों को मौखिक रूप से सुनने की आवश्यकता नहीं होगी।

समूह के गठन के 3 सप्ताह के भीतर समाधान योजना कोर्ट के समक्ष पेश की जाएगी।

इसके अलावा, कोर्ट ने राजस्थान राज्य को एक 'नदी आयोग' या 'नदी कायाकल्प प्राधिकरण' (River Rejuvenation Authority) गठित करने का निर्देश दिया, जो स्वतंत्र और पर्याप्त रूप से अधिकार-संपन्न हो। इस प्राधिकरण की अध्यक्षता भी (फिलहाल) राज्य के मुख्य सचिव करेंगे। यह प्राधिकरण नदियों, नदी बेसिन और जलग्रहण क्षेत्रों (Catchment Areas) के संरक्षण, कायाकल्प और एकीकृत प्रबंधन की देखरेख करेगा। इसमें 'हाई फ्लड लाइन' (अधिकतम बाढ़ स्तर रेखा) का वैज्ञानिक निर्धारण और सीमांकन, नदी के पारिस्थितिकी तंत्र की सुरक्षा और पूरे राज्य में नदी बेसिन के कामकाज का समन्वित प्रबंधन शामिल होगा। मुख्य सचिव को आवश्यकतानुसार ऐसे अधिकारियों या विशेषज्ञों को शामिल करने की छूट होगी।

कोर्ट ने पर्यावरण नियमों के उल्लंघन से जुड़े लंबित आपराधिक मामलों में प्रयासों को तेज करने का भी निर्देश दिया। इसमें कहा गया कि राज्य के आदेश पर बनी स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) को बिना किसी डर या पक्षपात के सभी लोगों (सरकारी कर्मचारियों सहित) की भूमिका की जांच करनी चाहिए और उचित कार्रवाई करनी चाहिए।

बता दें, यह SIT जोधपुर, बालोतरा और पाली में छिपे हुए कंड्यूट नेटवर्क, बिना ट्रीट किए या ठीक से ट्रीट न किए गए इंडस्ट्रियल वेस्ट (Effluents) के डिस्चार्ज आदि से जुड़ी सभी FIR की जांच के लिए बनाई गई।

आगे यह भी निर्देश दिया गया कि कमेटी 'व्हाइट कैटेगरी' की इंडस्ट्रीज़ की लंबित अर्जियों पर तेज़ी से फ़ैसला ले, और हो सके तो आदेश की तारीख (7 अगस्त) के 7 दिनों के भीतर ऐसा करे।

कोर्ट ने यह भी आदेश दिया कि राज्य एक 'इंटीग्रेटेड पब्लिक रिपोर्टिंग और एनवायरनमेंटल ग्रीवेंस रिड्रेसल मैकेनिज्म' (पर्यावरण से जुड़ी शिकायतों के समाधान का सिस्टम) बनाए, ताकि पर्यावरण के नियमों के उल्लंघन और नदी के इकोसिस्टम पर असर डालने वाली गतिविधियों की समय पर रिपोर्टिंग हो सके। इस सिस्टम से कोई भी व्यक्ति, जिसके पास उल्लंघन के बारे में कोई विश्वसनीय जानकारी हो, वह फ़ोटो, वीडियो, जियो-टैग लोकेशन आदि के साथ शिकायत कर सकेगा। राज्य को विश्वसनीय जानकारी देने वालों को इनाम देने की योजना की संभावना पर भी विचार करना चाहिए।

आदेश में कोर्ट ने यह भी कहा कि RSPCB के दोषी अधिकारियों के खिलाफ की गई या की जाने वाली कार्रवाई के बारे में राज्य ने कोई जानकारी नहीं दी। निर्देश दिया गया कि इसे 3 दिनों के भीतर कमेटी के सामने रखा जाए। कोर्ट ने आगे संकेत दिया कि वह अगली तारीख पर जयपुर और आस-पास के इलाकों से जुड़े ऐसे ही मुद्दों पर विचार करेगा। जोजारी-बांडी-लूनी नदी सिस्टम के लिए एक उचित ढांचा तैयार होने के बाद वह यह देखेगा कि क्या इस ढांचे को, उचित बदलावों के साथ राज्य की अन्य नदी प्रणालियों तक भी बढ़ाया जा सकता है, जो इसी तरह की समस्याओं से जूझ रही हैं।

Case: In Re: 2 Million Lives At Risk, Contamination In Jojari River, Rajasthan, Suo Motu Writ Petition (Civil) No. 8 of 2025

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