"क्या अदालत जंतर-मंतर है?' : ED की याचिका की सुनवाई में बाधा डालने वाले हंगामे से सुप्रीम कोर्ट चिंतित
प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा I-PAC कार्यालय पर की गई छापेमारी में पश्चिम बंगाल सरकार की कथित दखलअंदाजी के खिलाफ दायर याचिका पर सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने आज कलकत्ता हाईकोर्ट में 9 जनवरी को हुई अव्यवस्था (हंगामे) पर गहरी चिंता जताई।
जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा और जस्टिस विपुल एम. पंचोली की खंडपीठ के समक्ष ED ने बताया कि 9 जनवरी को जब उसका मामला हाईकोर्ट में सूचीबद्ध था, उससे पहले तृणमूल कांग्रेस (TMC) की लीगल सेल द्वारा व्हाट्सऐप पर संदेश भेजकर लोगों को कोर्ट में जुटने के लिए कहा गया था।
“जब भीड़तंत्र लोकतंत्र की जगह ले ले…” – ED
सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सुप्रीम कोर्ट में कहा:
“बड़ी संख्या में वकील और अन्य लोग कोर्ट रूम में घुस आए और हंगामा किया। हाईकोर्ट की पीठ ने रिकॉर्ड किया कि सुनवाई के लिए माहौल अनुकूल नहीं था। जब लोकतंत्र की जगह भीड़तंत्र ले ले, तो यही होता है।”
उन्होंने बताया कि TMC की लीगल सेल के व्हाट्सऐप संदेशों में लिखा गया था — “सब लोग आओ”।
इस पर न्यायमूर्ति मिश्रा ने टिप्पणी की:
“'सब लोग आओ'? जैसे जंतर-मंतर हो!”
(जंतर-मंतर दिल्ली में प्रदर्शन का प्रमुख स्थल है।)
बसों से लोगों को लाने का आरोप
SG मेहता ने यह भी दावा किया कि 9 जनवरी को लोगों को हाईकोर्ट लाने के लिए बसों और वाहनों की व्यवस्था की गई थी। उन्होंने कहा कि इसी कारण सुनवाई बाधित हुई और हाईकोर्ट को मामला स्थगित करना पड़ा।
उन्होंने बताया कि अगले दिन (10 जनवरी) की सुनवाई से पहले कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश को अनधिकृत लोगों की कोर्ट रूम में एंट्री रोकने के लिए प्रशासनिक आदेश जारी करना पड़ा।
सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी
जस्टिस मिश्रा ने कहा कि हाईकोर्ट ने खुद हंगामे को रिकॉर्ड किया है और यह एक गंभीर स्थिति है।
“अगर आज एक हाईकोर्ट में ऐसा हुआ है, तो कल किसी और हाईकोर्ट में भी हो सकता है। यह स्वीकार्य नहीं है कि इस तरह न्यायिक कार्यवाही में बार-बार बाधा डाली जाए।”
उन्होंने कहा कि हाईकोर्ट में जो हुआ, वह “परेशान करने वाला” है।
इन घटनाओं के बाद सुप्रीम कोर्ट ने:
ED की याचिका पर नोटिस जारी किया
ED अधिकारियों के खिलाफ बंगाल पुलिस द्वारा दर्ज FIR पर रोक लगा दी
I-PAC रेड से जुड़े CCTV फुटेज सुरक्षित रखने का आदेश दिया